BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

जापान में क्वांटम कंप्यूटिंग की नई उपलब्धि, ‘शुंकाई’ ने शुरू किया संचालन


टोक्यो/ओकाजाकी। जापान ने क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपना पहला फुल-स्टैक न्यूट्रल-एटम क्वांटम कंप्यूटर ‘शुंकाई’ (Shunkai) संचालन में ला दिया है। इसे इंस्टीट्यूट फॉर मॉलिक्यूलर साइंस यानी IMS की टीम ने प्रोफेसर केनजी ओहमोरी के नेतृत्व में विकसित किया है। यह परियोजना जापान के Cabinet Office और JST के Moonshot R&D Program तथा MEXT Q-LEAP से जुड़ी है।

क्या है शुंकाई की खासियत?

शुंकाई की सबसे बड़ी विशेषता इसका न्यूट्रल-एटम आर्किटेक्चर है। पारंपरिक सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटरों में बहुत कम तापमान बनाए रखने के लिए जटिल क्रायोजेनिक सिस्टम की जरूरत पड़ती है, जबकि न्यूट्रल-एटम तकनीक में पूरा कंप्यूटिंग सिस्टम कमरे के सामान्य तापमान पर संचालित किया जा सकता है। हालांकि क्वांटम बिट के रूप में इस्तेमाल परमाणुओं को नियंत्रित रखने के लिए उन्हें अल्ट्राकोल्ड अवस्था में लेजर तकनीक से तैयार किया जाता है।

यही वजह है कि इसे “रूम-टेम्परेचर क्वांटम कंप्यूटर” कहा जा रहा है। इसका अर्थ मुख्य रूप से यह है कि सिस्टम को काम करने के लिए विशाल रेफ्रिजरेशन या अत्यधिक क्रायोजेनिक वातावरण पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

फुल-स्टैक का मतलब क्या है?

शुंकाई को सिर्फ एक प्रयोगशाला स्तर का क्वांटम प्रोसेसर नहीं बताया गया है। यह फुल-स्टैक सिस्टम है, यानी इसमें यूजर इनपुट से लेकर क्वांटम प्रोसेसर को नियंत्रित करने और गणना का परिणाम वापस प्राप्त करने तक आवश्यक अलग-अलग परतों को एक साथ जोड़ा गया है।

इस परियोजना में Hitachi ने सॉफ्टवेयर स्टैक के विकास में सहयोग किया, जबकि Infleqtion ने क्वांटम प्रोसेसिंग यूनिट यानी QPU से जुड़े हार्डवेयर में योगदान दिया। IMS ने पूरे सिस्टम के एकीकरण और अनुसंधान का नेतृत्व किया।

परमाणु ही बनते हैं क्वांटम बिट

शुंकाई में एक-एक परमाणु को क्वांटम बिट यानी qubit के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इन परमाणुओं को बहुत सूक्ष्म लेजर बीमों से बने optical tweezers की मदद से पकड़ा और व्यवस्थित किया जाता है।

इसके बाद माइक्रोवेव या लेजर प्रकाश के जरिए परमाणुओं की क्वांटम अवस्था को नियंत्रित किया जाता है। गणना पूरी होने पर हर परमाणु से निकलने वाले fluorescence संकेत को कैमरे की मदद से पढ़कर परिणाम हासिल किया जाता है।

अभी कितने qubits हैं?

शुंकाई के शुरुआती चरण में करीब 50 physical qubits का उपयोग किया जा रहा है। शोध टीम का निकट अवधि का लक्ष्य इसकी क्षमता को लगभग 500 qubits तक बढ़ाना है।

इसके बाद महत्वाकांक्षा और बड़ी है। जापान की परियोजना मार्च 2031 तक करीब 10,000 physical qubits वाला बड़े पैमाने का fault-tolerant न्यूट्रल-एटम क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने का लक्ष्य रखती है। इस चरण में क्वांटम error detection और correction की क्षमताएं भी शामिल करने की योजना है।

10 हजार qubits तक पहुंचना क्यों बड़ी चुनौती है?

क्वांटम कंप्यूटरों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है कि qubits बेहद संवेदनशील होते हैं। बाहरी व्यवधान या सिस्टम में छोटी-सी त्रुटि भी क्वांटम जानकारी को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल qubits की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; उन्हें लंबे समय तक स्थिर रखना और गलतियों को पहचानकर सुधारना भी जरूरी है।

जापानी शोध परियोजना इसी कारण fault-tolerant quantum computing पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है जिसमें त्रुटियों की पहचान और सुधार के बाद भरोसेमंद क्वांटम गणना संभव हो सके। JST के अनुसार 2028 तक क्वांटम error correction की प्रभावशीलता प्रदर्शित करने और 2030 तक logical qubits के साथ universal gate set की दिशा में प्रगति का लक्ष्य रखा गया है।

न्यूट्रल-एटम तकनीक को क्यों मिल रहा है ध्यान?

न्यूट्रल-एटम सिस्टम में परमाणुओं को जरूरत के अनुसार स्थानांतरित और पुनर्व्यवस्थित किया जा सकता है। इससे अलग-अलग एल्गोरिद्म के लिए qubit configuration में बदलाव करना आसान हो सकता है और विभिन्न qubits के बीच entanglement तैयार करने की क्षमता मिलती है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह लचीलापन बड़े सिस्टम बनाने और भविष्य में error correction लागू करने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि न्यूट्रल-एटम क्वांटम कंप्यूटिंग को दुनिया भर में एक तेजी से उभरती तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।

बाहरी शोधकर्ताओं के लिए भी खुलेगा सिस्टम

शुंकाई को केवल जापानी शोध टीम के उपयोग तक सीमित रखने की योजना नहीं है। परियोजना के तहत इसे आंशिक रूप से बाहरी शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है, ताकि वे नए क्वांटम एप्लिकेशन विकसित कर सकें और error-correction तकनीकों का परीक्षण कर सकें।

इसका मतलब है कि आने वाले समय में विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और औद्योगिक शोध समूहों को इस प्लेटफॉर्म के साथ काम करने का मौका मिल सकता है। इससे वास्तविक समस्याओं पर क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रयोग और परीक्षण को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

क्वांटम और GPU कंप्यूटिंग को जोड़ने की तैयारी

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जापानी टीम शुंकाई को एक मौजूदा साझा सुपरकंप्यूटिंग सुविधा के साथ जोड़कर quantum-GPU hybrid computing center बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग और पारंपरिक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करना है।

ऐसी व्यवस्था भविष्य में उन कामों के लिए उपयोगी हो सकती है जहां किसी समस्या के अलग-अलग हिस्सों को classical computing और quantum processing में बांटकर हल किया जाए।

जापान की क्वांटम रणनीति में एक नया चरण

शुंकाई का संचालन जापान के लिए सिर्फ एक नए कंप्यूटर की शुरुआत नहीं है। यह उस बड़े राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है जिसमें जापान fault-tolerant और बड़े पैमाने के क्वांटम सिस्टम विकसित करना चाहता है।

Moonshot Goal 6 के तहत जापान का व्यापक लक्ष्य 2050 तक fault-tolerant universal quantum computer की दिशा में काम करना है। इसके लिए hardware, error correction, networking और applications—कई स्तरों पर समानांतर अनुसंधान चल रहा है।

आगे की राह

अब असली चुनौती शुंकाई के संचालन को स्थिर बनाना, qubits की संख्या बढ़ाना, error rates को कम करना और लंबे समय तक विश्वसनीय गणना हासिल करना है। करीब 50 qubits से 500 और फिर 10,000 physical qubits तक पहुंचने के बीच कई तकनीकी चरण पूरे करने होंगे।

जापान के लिए शुंकाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शोध प्रयोग से आगे बढ़कर एकीकृत, उपयोग योग्य क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में कदम है। आने वाले वर्षों में इसकी असली उपयोगिता इस बात से तय होगी कि यह कितनी स्थिर, सटीक और बड़े पैमाने पर उपयोगी गणना कर पाता है।

निष्कर्ष

जापान का ‘शुंकाई’ फिलहाल लगभग 50 qubits से अपनी यात्रा शुरू कर रहा है, लेकिन इसके पीछे लक्ष्य बहुत बड़ा है—पहले 500 qubits और फिर मार्च 2031 तक 10,000 physical qubits वाले fault-tolerant सिस्टम की दिशा में बढ़ना। न्यूट्रल-एटम तकनीक और फुल-स्टैक एकीकरण इसे जापान के क्वांटम अनुसंधान में एक उल्लेखनीय नया चरण बनाते हैं।