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अरका जैन विश्वविद्यालय में संताली भाषा में राष्ट्रीय अकादमिक संवाद 29 सितंबर से


जमशेदपुर: भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देने की दिशा में अरका जैन विश्वविद्यालय, जमशेदपुर एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट द्वारा आगामी 29 एवं 30 सितंबर 2026 को दो दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। एआईसीटीई-वाणी (AICTE-VANI) द्वारा प्रायोजित इस विशेष कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें होने वाला अकादमिक संवाद संताली भाषा में किया जाएगा।

कार्यक्रम का मुख्य विषय “आपदा जोखिम न्यूनीकरण का सतत विकास लक्ष्यों, जलवायु परिवर्तन एवं स्वास्थ्य जोखिमों के साथ एकीकरण” रखा गया है। दो दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय अकादमिक संवाद में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास लक्ष्य, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय चुनौतियां, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम तथा इनके सामाजिक प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस आयोजन के माध्यम से विश्वविद्यालय का प्रयास है कि गंभीर अकादमिक और सामाजिक विषयों पर होने वाली चर्चा को स्थानीय भाषा के माध्यम से अधिक व्यापक समुदाय तक पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थी, प्राध्यापक, शोधार्थी और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। प्रतिभागियों को संताली भाषा में अपने विचार, शोध अनुभव और स्थानीय स्तर पर प्राप्त ज्ञान को साझा करने का अवसर मिलेगा।

आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय आज केवल पर्यावरण या विज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध समाज, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, आजीविका और सतत विकास से है। ऐसे में स्थानीय समुदायों के अनुभवों और पारंपरिक ज्ञान को अकादमिक विमर्श से जोड़ना कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

इस पहल के संबंध में अरका जैन विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) अंगद तिवारी ने बताया कि, “भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा और ज्ञान-विमर्श को बढ़ावा देना आज समय की आवश्यकता है। संताली भाषा में राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक संवाद का आयोजन विद्यार्थियों, शोधार्थियों और स्थानीय समुदायों को अपनी भाषा में गंभीर विषयों को समझने और उन पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करेगा। यह पहल ज्ञान को केवल अकादमिक संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने में सहायक होगी।” उन्होंने कहा कि संताली जैसी भारतीय भाषाओं में अकादमिक संवाद को प्रोत्साहित करने से स्थानीय अनुभवों और पारंपरिक ज्ञान को शोध एवं उच्च शिक्षा के साथ जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार की पहल को भारतीय भाषाओं को उच्च शिक्षा और शोध के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की असिस्टेंट डीन डॉ. पोम्पी दास सेनगुप्ता के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए संयोजक डॉ. पार्था प्रिय दास तथा सह-संयोजक प्रो. बी. सी. अनंत द्वारा आयोजन एवं अकादमिक समन्वय की जिम्मेदारी संभाली जा रही है।

आयोजकों के अनुसार, दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विभिन्न अकादमिक सत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभाव, स्वास्थ्य जोखिम, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन, सतत विकास लक्ष्यों और स्थानीय ज्ञान की भूमिका जैसे विषयों को अकादमिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

एआईसीटीई-वाणी के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा एवं विशेषज्ञ ज्ञान के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक मंच के रूप में सामने आ रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी देने का प्रयास किया जाएगा कि ज्ञान की भाषा जितनी अधिक समावेशी होगी, उसका सामाजिक प्रभाव उतना ही व्यापक हो सकता है।

अरका जैन विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय अकादमिक संवाद विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां संताली भाषा के माध्यम से अकादमिक ज्ञान, स्थानीय अनुभव, पारंपरिक समझ और समकालीन चुनौतियों पर संवाद किया जाएगा। उम्मीद है कि यह दो दिवसीय आयोजन झारखंड में भारतीय भाषाओं के माध्यम से उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के साथ-साथ आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता एवं अकादमिक चर्चा को भी व्यापक बनाएगा।