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यूरोप में चमगादड़ों की उत्पत्ति पर नई खोज, 6.5 करोड़ साल पुरानी कहानी फिर लिखी गई


लंदन/बर्लिन। चमगादड़ों की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों की लंबे समय से चली आ रही धारणा को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चुनौती दी है। Nature में प्रकाशित नई रिसर्च के मुताबिक, चमगादड़ों के शुरुआती पूर्वजों की उत्पत्ति लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पहले यूरोप में हुई होने की सबसे मजबूत संभावना सामने आई है। इसके बाद उनकी वंश-परंपरा अफ्रीका और फिर एशिया, अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों तक फैलने का संकेत देती है।

137 वैज्ञानिकों की बड़ी टीम ने किया अध्ययन

यह शोध Bat1K consortium से जुड़े 137 वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया। शोधकर्ताओं ने जीवित चमगादड़ों के बड़े पैमाने पर आनुवंशिक डेटा को जीवाश्म साक्ष्यों के साथ जोड़ा, ताकि उनके विकासक्रम और भौगोलिक उत्पत्ति का ज्यादा विश्वसनीय मॉडल तैयार किया जा सके। अध्ययन में 103 चमगादड़ प्रजातियों के क्रोमोसोम-स्तरीय जीनोम शामिल किए गए, जिनमें 42 नए जीनोम असेंबली भी थीं।

इसके अलावा शोधकर्ताओं ने 44 प्राचीन जीवाश्म चमगादड़ों के शारीरिक लक्षणों का अध्ययन किया। कुल मिलाकर 65 प्रजातियों के लिए 699 morphological characters का डेटासेट तैयार किया गया, जिससे आनुवंशिक और जीवाश्म दोनों तरह के प्रमाणों को एक साथ विश्लेषित किया गया।

पहले वैज्ञानिकों की सोच क्या थी?

चमगादड़ों की उत्पत्ति का सवाल इसलिए कठिन रहा है क्योंकि उनका जीवाश्म रिकॉर्ड काफी अधूरा है। उनके शुरुआती जीवाश्म कम संख्या में मिले हैं और कई बार केवल दांत या हड्डियों के अलग-अलग हिस्से ही उपलब्ध होते हैं। इसी वजह से अलग-अलग अध्ययनों ने कभी एशिया, कभी अफ्रीका और कभी उत्तरी अमेरिका को संभावित मूल क्षेत्र माना था।

नई रिसर्च का महत्व यही है कि इसमें सिर्फ पुराने जीवाश्मों की भौगोलिक स्थिति देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला गया, बल्कि आधुनिक चमगादड़ों के जीनोम और जीवाश्मों को एक साझा evolutionary framework में रखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार इस संयुक्त पद्धति ने पुराने अध्ययनों में मौजूद कई विरोधाभासी संकेतों को समझने में मदद की।

यूरोप से दुनिया तक फैलने का संकेत

अध्ययन के मॉडल के मुताबिक चमगादड़ों का शुरुआती विकास Late Paleocene यानी लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पहले यूरोप में हुआ। इसके बाद शुरुआती वंशजों के अफ्रीका की ओर फैलने और वहां से दुनिया के अन्य हिस्सों में विस्तार करने की सबसे संभावित तस्वीर सामने आती है। अध्ययन में यूरोपीय उत्पत्ति के लिए 99.2% posterior probability वाला मॉडल बताया गया है।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि जीवाश्म रिकॉर्ड अधूरा होने के कारण वैज्ञानिक इसे ऐतिहासिक घटनाक्रम की प्रत्यक्ष वीडियो जैसी निश्चित तस्वीर नहीं मानते। यह उपलब्ध जीनोमिक, जीवाश्म और भौगोलिक डेटा से तैयार किया गया सबसे संभावित evolutionary reconstruction है।

चमगादड़ों के उड़ने की कहानी पर भी असर

इस खोज का असर केवल भौगोलिक उत्पत्ति तक सीमित नहीं है। चमगादड़ दुनिया के एकमात्र ऐसे स्तनधारी हैं जिन्होंने सक्रिय उड़ान विकसित की। इसलिए यदि उनके शुरुआती पूर्वज यूरोप में विकसित हुए थे, तो उनके उड़ने की शुरुआती evolutionary history को भी नए नजरिए से देखने की जरूरत पड़ती है। Nature अध्ययन के मुताबिक powered flight की उत्पत्ति भी इसी शुरुआती यूरोपीय वंश के साथ जुड़ी दिखाई देती है।

वैज्ञानिकों के लिए यह सवाल अहम है कि उड़ान पहले विकसित हुई या दूसरी विशेषताएं उसके साथ लगभग समान अवधि में विकसित हुईं। नई रिसर्च से संकेत मिलता है कि चमगादड़ों की शुरुआती evolutionary history में flight और दूसरे अनुकूलन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े रहे होंगे।

Echo-location भी बहुत पुरानी विशेषता निकली

चमगादड़ों की सबसे प्रसिद्ध क्षमताओं में से एक है echolocation, यानी आवाज की तरंगों के लौटकर आने से आसपास की वस्तुओं और शिकार का पता लगाना। नई रिसर्च में एक महत्वपूर्ण संकेत यह मिला कि laryngeal echolocation संभवतः modern crown bats के बड़े diversification से भी पहले विकसित हो चुकी थी।

शोधकर्ताओं ने जीवाश्म Vielasia को शुरुआती ‘Eochiroptera’ समूह में रखने के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। इसका मतलब यह हो सकता है कि चमगादड़ों के शुरुआती पूर्वजों में ध्वनि आधारित दिशा-पहचान की क्षमता उनकी बाद की विविधता से पहले ही मौजूद थी।

लाखों साल का विकास और आज की विविधता

आज दुनिया में चमगादड़ों की 1,500 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं और वे जीवित स्तनधारी प्रजातियों के पांचवें हिस्से से भी अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। अलग-अलग प्रजातियां कीड़े, फल, मछली, मांस या अमृत जैसे अलग-अलग भोजन स्रोतों पर निर्भर करती हैं। इस विविधता के पीछे करोड़ों वर्षों का विकास और अलग-अलग पर्यावरणों के अनुरूप अनुकूलन जिम्मेदार है।

चमगादड़ केवल उड़ने वाले स्तनधारी होने के कारण ही वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। कई प्रजातियां अपने आकार के दूसरे स्तनधारियों की तुलना में असाधारण रूप से लंबी उम्र तक जीवित रहती हैं और उम्र बढ़ने तथा रोग-प्रतिरोध से जुड़े विशिष्ट जैविक गुण दिखाती हैं। नए बड़े जीनोमिक डेटासेट से इन विशेषताओं के पीछे मौजूद आनुवंशिक आधार को समझने के लिए भी बेहतर आधार तैयार हुआ है।

पुरानी तस्वीर क्यों बदली?

पहले उपलब्ध प्रमाणों में सबसे बड़ी समस्या यह थी कि शुरुआती चमगादड़ों के जीवाश्म बहुत कम और बिखरे हुए थे। दूसरी तरफ आधुनिक चमगादड़ दुनिया के लगभग हर महाद्वीप में पाए जाते हैं और उनकी उड़ने की क्षमता उन्हें लंबी दूरी तक फैलने की असाधारण क्षमता देती है। इससे केवल वर्तमान प्रजातियों के आधार पर उनके मूल क्षेत्र का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता था।

नई टीम ने इस समस्या से निपटने के लिए जीनोमिक डेटा, जीवाश्म आकृतियों और समय-आधारित भौगोलिक मॉडल को एक साथ इस्तेमाल किया। इस संयुक्त विश्लेषण ने उस evolutionary branch को पहचानने में मदद की जिसे शोधकर्ता चमगादड़ों के सबसे पुराने वंश से जोड़ते हैं।

इस खोज का वैज्ञानिक महत्व

चमगादड़ विकासवाद के अध्ययन के लिए एक अनोखा समूह हैं क्योंकि उनमें उड़ान, echolocation, असाधारण longevity और रोग-प्रतिरोध जैसी कई विशिष्ट विशेषताएं एक ही evolutionary lineage में मौजूद हैं। इसलिए उनके शुरुआती विकासक्रम को समझना सिर्फ जीवाश्म विज्ञान के लिए नहीं, बल्कि genetics और comparative biology के लिए भी महत्वपूर्ण है।

नए जीनोमिक संसाधन वैज्ञानिकों को अलग-अलग चमगादड़ प्रजातियों के बीच आनुवंशिक बदलावों की तुलना करने का मौका देंगे। भविष्य में इन्हीं डेटा का इस्तेमाल यह समझने में किया जा सकता है कि उड़ान, echolocation, लंबी उम्र और कुछ रोगों के प्रति असामान्य प्रतिरोध जैसी विशेषताएं किस तरह विकसित हुईं।

आगे की चुनौती

हालांकि नया अध्ययन चमगादड़ों की उत्पत्ति की तस्वीर को काफी मजबूत करता है, फिर भी वैज्ञानिकों के सामने कई सवाल बाकी हैं। खासतौर पर यूरोप में मौजूद उस शुरुआती वंश की प्रत्यक्ष जीवाश्म कड़ियां अभी भी सीमित हैं। नए fossil discoveries भविष्य में इस मॉडल की और पुष्टि या उसमें बदलाव कर सकते हैं।

यानी फिलहाल यह कहना अधिक वैज्ञानिक होगा कि चमगादड़ों की उत्पत्ति यूरोप में हुई होने का सबसे मजबूत प्रमाण सामने आया है, न कि यह कि उनकी जन्मस्थली को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया है। शोध स्वयं “probably originated” और “most likely” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है।

निष्कर्ष

लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पुरानी चमगादड़ों की evolutionary कहानी को लेकर नई रिसर्च ने बड़ा बदलाव पेश किया है। 103 जीनोम और 44 प्राचीन जीवाश्मों को एक साथ विश्लेषित करने के बाद वैज्ञानिकों ने यूरोप को इनके शुरुआती विकास का सबसे संभावित केंद्र बताया है। साथ ही echolocation के बहुत शुरुआती विकास के संकेत मिले हैं। इससे चमगादड़ों के विकास, दुनिया में उनके फैलाव और उनकी अनोखी जैविक खूबियों को समझने के लिए एक नया वैज्ञानिक ढांचा तैयार हुआ है।