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UN में वैश्विक असमानता पर नए अंतरराष्ट्रीय पैनल की पहल, IPCC जैसे मॉडल पर आगे बढ़ रही योजना


न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान वैश्विक आर्थिक और सामाजिक असमानता को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल ने गति पकड़ी है। 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय कार्यक्रम में ब्राजील, नॉर्वे, दक्षिण अफ्रीका और स्पेन ने प्रस्तावित International Panel on Inequality (IPI) के गठन के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की। इस पहल में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

क्या है International Panel on Inequality?

प्रस्तावित IPI का उद्देश्य दुनिया में आय, संपत्ति और अवसरों की असमानता पर उपलब्ध शोध और आंकड़ों को एक जगह लाकर उनका व्यवस्थित वैज्ञानिक आकलन करना है। प्रस्ताव के अनुसार यह संस्था अलग-अलग देशों और क्षेत्रों में असमानता की स्थिति, उसके कारणों, प्रभावों और उसे कम करने के लिए अपनाई गई नीतियों के परिणामों का नियमित विश्लेषण कर सकती है।

इसका मॉडल काफी हद तक Intergovernmental Panel on Climate Change यानी IPCC से प्रेरित है। लेकिन प्रस्तावित IPI का काम सीधे नई नीतियां लागू करना नहीं, बल्कि सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को प्रमाण-आधारित जानकारी उपलब्ध कराना होगा।

संयुक्त राष्ट्र में अब तक क्या हुआ?

23 सितंबर को UN General Assembly High-Level Week के दौरान इस विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक विवरण के मुताबिक इसका उद्देश्य IPI की स्थापना के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ाना और संभावित UN General Assembly resolution के जरिए इसके गठन की दिशा में आगे बढ़ना था।

दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, स्पेन और नॉर्वे इस प्रयास के प्रमुख समर्थक देशों के रूप में सामने आए हैं। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि पैनल के लिए अब संयुक्त राष्ट्र महासभा से समर्थन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है।

2025 के G20 रिपोर्ट से निकला था विचार

IPI की मौजूदा पहल की शुरुआत 2025 में दक्षिण अफ्रीका की G20 अध्यक्षता के दौरान हुई। राष्ट्रपति रामाफोसा के अनुरोध पर नोबेल अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज की अध्यक्षता में वैश्विक असमानता पर स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति बनाई गई थी।

इस समिति ने G20 के लिए तैयार अपनी रिपोर्ट में कहा कि नीति-निर्माताओं के पास असमानता के रुझानों और अलग-अलग नीतियों के प्रभावों को समझने के लिए कई बार पर्याप्त, विश्वसनीय और आसानी से उपलब्ध जानकारी नहीं होती। इसी आधार पर समिति ने एक नए अंतरराष्ट्रीय पैनल की स्थापना को अपनी प्रमुख सिफारिशों में शामिल किया।

G20 रिपोर्ट में असमानता की स्थिति कैसी बताई गई?

2025 की G20 विशेषज्ञ रिपोर्ट ने वैश्विक आय और संपत्ति के वितरण पर कई आंकड़े प्रस्तुत किए। रिपोर्ट के अनुसार 2000 से 2024 के बीच दुनिया में पैदा हुई नई संपत्ति का 41 प्रतिशत हिस्सा शीर्ष 1 प्रतिशत लोगों के पास गया, जबकि नीचे के 50 प्रतिशत हिस्से को लगभग 1 प्रतिशत मिला।

रिपोर्ट का निष्कर्ष था कि असमानता का प्रभाव केवल आय और संपत्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आर्थिक अवसर, सामाजिक प्रगति, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सार्वजनिक भरोसे से भी जुड़ सकता है। इन निष्कर्षों के आधार पर समिति ने बेहतर अंतरराष्ट्रीय डेटा और नियमित आकलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

IPI क्या-क्या करेगा?

प्रस्तावित पैनल को एक तकनीकी और डेटा-आधारित निकाय के रूप में डिजाइन करने की बात कही गई है। इसका संभावित काम चार प्रमुख हिस्सों में बांटा जा सकता है—असमानता के रुझानों की निगरानी, उसके कारणों और परिणामों का आकलन, उपलब्ध शोध का वैज्ञानिक संकलन और विभिन्न नीतियों के प्रभावों का मूल्यांकन।

G20 रिपोर्ट के अनुसार IPI खुद हर तरह का नया शोध करने के बजाय दुनिया भर में मौजूद शोध और आंकड़ों की समीक्षा करेगा, ज्ञान की कमियों की पहचान करेगा और समय-समय पर नीति-उपयोगी रिपोर्ट जारी कर सकता है।

किन मुद्दों को शामिल किया जा सकता है?

प्रस्ताव केवल वेतन या आय के अंतर तक सीमित नहीं है। इसमें संपत्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसर और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसी असमानताओं के बीच संबंधों का भी अध्ययन करने की बात है।

UN के कार्यक्रम के विवरण में कहा गया कि लगातार आय, संपत्ति और अवसरों की असमानता संस्थाओं पर भरोसे, सामाजिक एकजुटता और सतत विकास को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से IPI को वैश्विक स्तर पर असमानता के लिए साझा ज्ञान-आधार तैयार करने वाले निकाय के रूप में देखा जा रहा है।

IPCC जैसा मॉडल क्यों?

जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में IPCC दुनिया भर के वैज्ञानिक अध्ययनों को एकत्र कर उनके आधार पर आकलन रिपोर्ट तैयार करता है। IPI के प्रस्तावकों का कहना है कि असमानता के मामले में भी शोध कई देशों, विषयों और संस्थानों में बिखरा हुआ है।

नई संस्था का उद्देश्य इसी तरह विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय प्रणाली बनाना होगा, जो उपलब्ध ज्ञान का मूल्यांकन करके सरकारों और बहुपक्षीय संस्थाओं के सामने तुलनात्मक और नियमित तस्वीर रख सके। हालांकि IPI का अंतिम ढांचा, अधिकार क्षेत्र और शासन व्यवस्था अभी पूरी तरह तय नहीं हुई है।

कौन-कौन देश समर्थन कर रहे हैं?

फिलहाल इस पहल के प्रमुख सरकारी समर्थकों में दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, स्पेन और नॉर्वे शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अप्रैल 2026 में IPI की दिशा में हो रही प्रक्रिया के प्रति समर्थन जताया था।

इसके अलावा Nature में 9 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक लेख में पहल से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि 600 से अधिक अर्थशास्त्री और असमानता पर काम करने वाले विशेषज्ञ प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं।

जोसेफ स्टिग्लिट्ज की भूमिका

इस पहल के प्रमुख बौद्धिक चेहरों में अर्थशास्त्री जोसेफ स्टिग्लिट्ज हैं। उन्होंने 2025 में G20 की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व किया था और IPI की स्थापना का सुझाव उसी रिपोर्ट से सामने आया।

23 सितंबर के UN कार्यक्रम में उनके संदेश में यह तर्क रखा गया कि देशों के भीतर और देशों के बीच असमानता का बेहतर अध्ययन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था और मानव कल्याण से जुड़े सवालों को समझने में मदद कर सकता है।

भारत के लिए इसका क्या महत्व हो सकता है?

भारत जैसे बड़े और विविध देश के संदर्भ में असमानता का सवाल रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति, क्षेत्रीय विकास और डिजिटल पहुंच जैसे कई क्षेत्रों से जुड़ता है। प्रस्तावित IPI अगर स्थापित होता है, तो उसके वैश्विक आकलनों में अलग-अलग देशों के अनुभवों और नीतियों की तुलना शामिल हो सकती है।

हालांकि अभी यह तय नहीं है कि भविष्य का पैनल किन देशों के आंकड़ों और किन मानकों को किस तरह इस्तेमाल करेगा। इसलिए किसी खास देश के लिए इसके संभावित परिणामों का आकलन करना फिलहाल जल्दबाजी होगा।

क्या यह पैनल पहले ही बन चुका है?

यह अंतर स्पष्ट करना जरूरी है। International Panel on Inequality के गठन की पहल आगे बढ़ चुकी है, लेकिन सितंबर 2026 तक यह पूरी तरह स्थापित संयुक्त राष्ट्र निकाय नहीं बना है।

UN के आधिकारिक कार्यक्रम में इसे अभी “proposed International Panel on Inequality” कहा गया है और महासभा के समर्थन के जरिए इसकी स्थापना को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यानी वर्तमान चरण में संस्थागत ढांचा और औपचारिक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया अभी जारी है।

आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

अगला महत्वपूर्ण चरण इस पहल के लिए व्यापक सरकारी समर्थन जुटाना और संयुक्त राष्ट्र महासभा के स्तर पर प्रस्ताव को आगे बढ़ाना है। इसके बाद पैनल की संरचना, विशेषज्ञों के चयन, वित्तपोषण, सचिवालय और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया तय करनी होगी।

G20 समिति ने सुझाव दिया था कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों और विषयों के विशेषज्ञों को स्वतंत्र भूमिका दी जाए और जरूरत के अनुसार विभिन्न कार्यसमूह बनाए जाएं। इससे आय और संपत्ति के अलावा स्वास्थ्य, अवसर और दूसरे आयामों पर भी विशेषज्ञता जोड़ी जा सकती है।

निष्कर्ष

वैश्विक असमानता को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अब एक नए संस्थागत ढांचे की दिशा में चर्चा तेज हुई है। International Panel on Inequality का विचार 2025 की G20 विशेषज्ञ रिपोर्ट से निकला और 2026 में दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, नॉर्वे और स्पेन के नेतृत्व में इसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिलाने की कोशिश आगे बढ़ी है।

प्रस्तावित IPI का उद्देश्य सरकारों को निर्देश देना नहीं, बल्कि दुनिया भर में उपलब्ध शोध और आंकड़ों का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर असमानता की स्थिति, कारणों और नीतिगत प्रभावों पर विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना है। अब इसकी वास्तविक स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा के समर्थन और आगे की अंतरसरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।