रियाद/न्यूयॉर्क। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। 24 सितंबर 2026 को सऊदी अरब ने यमन के हूती समूह की ओर से दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइलों को intercept करने की जानकारी दी। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक इनमें से कुछ मिसाइलों का लक्ष्य पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ और लाल सागर के किनारे स्थित यानबू क्षेत्र थे। सऊदी अरब की ओर से मिसाइलों को नष्ट करने की जानकारी के बाद हूती सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि संगठन ने रियाद में एक “संवेदनशील लक्ष्य” और यानबू में Saudi Aramco से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया। हूती पक्ष ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन इस्तेमाल करने की बात कही। हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार रियाद पर हमले की हूती दावे की उस समय सऊदी अधिकारियों ने तत्काल पुष्टि नहीं की थी। इसलिए दावे और पुष्टि की गई घटनाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। हमलों की खबर के बाद बाजार में यह आशंका बढ़ी कि सऊदी अरब से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। खास चिंता लाल सागर और यानबू मार्ग को लेकर है, क्योंकि यह सऊदी तेल के निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ते के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। 24 सितंबर को तेल के दोनों प्रमुख बेंचमार्क शुरुआती कारोबार में करीब 5 प्रतिशत तक चढ़ गए। बाद में अमेरिकी-ईरानी बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की संभावना की खबरों से तेजी कुछ कम हुई। उस समय Brent करीब 105.12 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 94.15 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। बाद में गुरुवार के कारोबार में Brent करीब 3.4 प्रतिशत और WTI करीब 2.7 प्रतिशत ऊपर बंद हुए। शुक्रवार की शुरुआती ट्रेडिंग में हालांकि कीमतों में कुछ नरमी दिखी। Brent करीब 105.73 डॉलर और WTI करीब 93.05 डॉलर प्रति बैरल पर थे, क्योंकि बाजार एक ओर मध्य पूर्व के हमलों को देख रहा था तो दूसरी ओर संभावित अमेरिका-ईरान समझौते की खबरों पर भी प्रतिक्रिया दे रहा था। यानबू सऊदी अरब के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेल निर्यात क्षेत्र है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। सऊदी अरब ने अपने East-West Pipeline के जरिए तेल को देश के पश्चिमी तट तक पहुंचाने की कोशिश की है, ताकि होर्मुज पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सके। 11 सितंबर के ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन को बंद करना पड़ा था, लेकिन 22 सितंबर को इसके संचालन को फिर शुरू किया गया। हालांकि पूरी क्षमता तक पहुंचने में कई सप्ताह लगने का अनुमान है। East-West Pipeline की क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन है। रॉयटर्स के मुताबिक पाइपलाइन को दोबारा चालू करने के बाद शुरुआत में कम दर पर पंपिंग शुरू हुई और लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन की प्रवाह क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया। रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि हमले से तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए थे। इसलिए सामान्य स्तर तक संचालन वापस लाने में छह से आठ सप्ताह तक लग सकते हैं। पाइपलाइन की बहाली ने बाजार को यह संकेत दिया कि सऊदी अरब वैकल्पिक मार्गों के जरिए तेल प्रवाह बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति पर इस समय एक साथ कई जोखिम दिखाई दे रहे हैं। होर्मुज में समुद्री यातायात में बाधा, लाल सागर क्षेत्र में हूती गतिविधियां और सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हालिया हमले बाजार के लिए चिंता बढ़ा रहे हैं। Reuters के एक विश्लेषण के अनुसार, कुछ खाड़ी उत्पादक अब ओमान के पास ship-to-ship transfers का सहारा लेकर तेल की आवाजाही जारी रख रहे हैं। सितंबर में इस तरह के हस्तांतरण की मात्रा अगस्त की तुलना में काफी बढ़ी है। हालांकि इससे आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है, लेकिन परिवहन और बीमा लागत बहुत बढ़ गई है। मध्य पूर्व और रूस से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के कारण वैश्विक डीजल बाजार पर भी दबाव बना हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया कि हाल के सप्ताहों में कई बाजारों में डीजल कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचीं। ऐसे माहौल में यदि किसी बड़े उत्पादक देश की तेल या रिफाइनिंग क्षमता पर अतिरिक्त हमला होता है, तो उसका असर सिर्फ कच्चे तेल पर नहीं बल्कि डीजल, जेट फ्यूल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों पर भी पड़ सकता है। तेल बाजार की प्रतिक्रिया सिर्फ हमलों पर निर्भर नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की संभावना की खबरों ने तेजी को सीमित किया है। इसी वजह से तेल बाजार में इस समय काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में संघर्ष बढ़ता है या कूटनीतिक बातचीत से ऊर्जा आपूर्ति के रास्ते कुछ सामान्य होते हैं। तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर इसका प्रभाव परिवहन, विनिर्माण, रसायन, विमानन और बिजली उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से रिफाइनिंग लागत और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। हालांकि मौजूदा स्थिति को तत्काल वैश्विक तेल संकट कहना जल्दबाजी होगी। सऊदी पाइपलाइन की बहाली, वैकल्पिक शिपिंग रास्तों का इस्तेमाल और दूसरे देशों से उपलब्ध आपूर्ति बाजार को कुछ सहारा दे रही है। दूसरी तरफ लगातार हमले और कम होते सुरक्षा मार्जिन जोखिम को बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से तीन चीजों पर रहेगी—सऊदी ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा, होर्मुज में समुद्री यातायात की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत। अगर तेल निर्यात मार्गों पर नए हमले बढ़ते हैं, तो बाजार में जोखिम प्रीमियम फिर बढ़ सकता है। इसके उलट यदि होर्मुज मार्ग खुलता है और सऊदी तेल निर्यात सामान्य होने लगता है, तो आपूर्ति की चिंता कुछ कम हो सकती है। फिलहाल दोनों संभावनाएं बाजार में एक साथ कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को फिर अस्थिर कर दिया है। सऊदी अरब द्वारा छह हूती बैलिस्टिक मिसाइलों को intercept किए जाने की खबर के बाद गुरुवार को तेल कीमतों में तेज उछाल आया, हालांकि शुक्रवार को संभावित अमेरिका-ईरान बातचीत के कारण कुछ नरमी भी दिखी। सऊदी East-West Pipeline की बहाली राहत का संकेत है, लेकिन लाल सागर, यानबू और होर्मुज से जुड़े जोखिम अभी भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। कॉपीराइट नोट: यह समाचार उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के तथ्यों के आधार पर मौलिक शब्दों, स्वतंत्र वाक्य-विन्यास और नए समाचार-फॉर्मेट में तैयार किया गया है। किसी स्रोत की सामग्री को लाइन-दर-लाइन कॉपी नहीं किया गया है। फोटो, वीडियो, ग्राफिक्स और अन्य मीडिया के अधिकार अलग हो सकते हैं।हूती समूह ने क्या दावा किया?
तेल की कीमतों में क्यों आया उछाल?
यानबू क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
पाइपलाइन की बहाली से मिली कुछ राहत
युद्ध के बीच तेल आपूर्ति के कई रास्ते दबाव में
सिर्फ तेल ही नहीं, डीजल बाजार भी प्रभावित
अमेरिका-ईरान बातचीत से बाजार को दूसरी दिशा में संकेत
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
आगे बाजार किस पर नजर रखेगा?
निष्कर्ष
मध्य पूर्व संकट का असर वैश्विक तेल बाजार पर फिर तेज, सऊदी अरब ने हूती मिसाइलें रोकीं






