नंगे पांव दौड़ने वाली कविता को मिली मदद, अब जूते पहनकर होमगार्ड बनने की तैयारी में जुटी
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
रामगढ़। एक साड़ी, नंगे पांव और आंखों में वर्दी पहनने का सपना। मैदान में दौड़ती कविता की तस्वीर जब सामने आई तो यह सिर्फ एक खबर नहीं रही, बल्कि समाज के सामने एक सवाल बनकर खड़ी हो गई। क्या प्रतिभा को सिर्फ इसलिए रुक जाना चाहिए क्योंकि उसके पास संसाधन नहीं हैं? कविता की संघर्ष भरी कहानी सामने आते ही खबर तेजी से वायरल हुई। इसके बाद मदद के लिए हाथ बढ़ने लगे। किसी ने जूते दिए, किसी ने ट्रैक सूट उपलब्ध कराया तो किसी ने तैयारी में सहयोग का भरोसा दिया।
पहले नंगे पांव, अब जूतों के साथ दौड़
कुछ दिन पहले तक कविता साड़ी में नंगे पांव मैदान में दौड़ लगाकर होमगार्ड भर्ती की तैयारी करती थी। पैरों में जूते नहीं थे, लेकिन कदमों में रफ्तार और आंखों में मंजिल साफ थी। अब वही कविता ट्रैक सूट और जूते पहनकर मैदान में उतर रही है।
सुविधाएं बदली हैं, लेकिन उसकी मेहनत और लक्ष्य नहीं बदला।
मददगारों की कतार ने दिया नया हौसला
कविता की कहानी लोगों के दिल को छू गई। खबर सामने आने के बाद कई लोग उसकी मदद के लिए आगे आए। मदद का यह सिलसिला कविता के लिए सिर्फ सामान मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उसके आत्मविश्वास को भी नई ताकत मिली है। कल तक जो संघर्ष वह अकेले कर रही थी, आज उसमें समाज का एक हिस्सा उसके साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
वर्दी का सपना, पसीने से लिख रही सफलता की कहानी
कविता जानती है कि होमगार्ड में चयन के लिए सिर्फ सपना देखना काफी नहीं है। इसके लिए मैदान में पसीना बहाना होगा, अपनी शारीरिक क्षमता साबित करनी होगी और हर दिन खुद को कल से बेहतर बनाना होगा। इसी जुनून के साथ कविता रोज अभ्यास में जुटी है। उसका लक्ष्य साफ है। होमगार्ड की वर्दी।
कविता की कहानी में असली हीरो कौन?
कविता की कहानी में मददगारों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन इस कहानी की असली ताकत उसका हौसला और मेहनत है। संसाधनों की कमी ने उसके कदम जरूर धीमे किए, लेकिन रोक नहीं पाए। साड़ी से ट्रैक सूट तक का यह सफर सिर्फ कपड़ों का बदलाव नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की कहानी है कि अगर हौसला जिंदा हो तो मुश्किल हालात भी रास्ता रोक नहीं सकते।
अब इंतजार सिर्फ एक तस्वीर का…
कविता की संघर्ष यात्रा ने लोगों को भावुक किया, मददगारों को आगे आने के लिए प्रेरित किया और अब उसकी मेहनत एक नए मुकाम की ओर बढ़ रही है। अब लोगों की नजर उस दिन पर है, जब कविता के संघर्ष की तस्वीर बदलेगी। साड़ी में नंगे पांव दौड़ने वाली कविता। एक दिन होमगार्ड की वर्दी में दौड़ती नजर आएगी। कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। असली मंजिल अभी बाकी है।






