भुवनेश्वर: अदाणी समूह की पोर्ट कंपनी Adani Ports and Special Economic Zone Limited (APSEZ) ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट से जुड़ी अपनी विस्तार योजना को आगे बढ़ाते हुए एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्थापित की है। कंपनी का नाम Paradip Mahanadi Terminal Limited रखा गया है। यह नई इकाई पारादीप पोर्ट पर दो ड्राई बल्क बर्थ के विकास और संचालन से जुड़े काम को संभालेगी। कंपनी का गठन 6 अक्टूबर 2026 को किया गया है। Paradip Mahanadi Terminal Limited को खास तौर पर पारादीप पोर्ट के CQ-I और CQ-II बर्थ के विकास और संचालन के लिए बनाया गया है। ये बर्थ मुख्य रूप से ड्राई बल्क कार्गो के संचालन से संबंधित हैं। APSEZ को सितंबर में इन दोनों बर्थ के विकास और संचालन के लिए सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में चुना गया था और उसे Letter of Award भी मिला था। इसके बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अलग पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बनाई गई है। पारादीप परियोजना के तहत APSEZ करीब 18 मिलियन मीट्रिक टन यानी 18 MMT की अतिरिक्त ड्राई बल्क कार्गो क्षमता विकसित करेगी। इससे कंपनी की पूर्वी भारत में पोर्ट और कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित बर्थ पर आधुनिक मैकेनाइज्ड कार्गो हैंडलिंग सिस्टम, गहरे पानी में बड़े जहाजों को संभालने की सुविधा और बड़े पैमाने पर स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है। यह परियोजना 30 साल की कन्सेशन अवधि के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य पारादीप पोर्ट की मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ड्राई बल्क कार्गो के संचालन को अधिक आधुनिक और कुशल बनाना है। पारादीप देश के प्रमुख बल्क कार्गो पोर्ट में शामिल है। यहां कोयला, लौह अयस्क, लाइमस्टोन, क्रोम अयस्क, उर्वरक और कई अन्य औद्योगिक वस्तुओं का संचालन होता है। पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार पारादीप का विशाल औद्योगिक और खनिज-समृद्ध hinterland इसे पूर्वी भारत के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स केंद्र बनाता है। नई बर्थ के जरिए APSEZ की कोयला, लाइमस्टोन और अन्य ड्राई बल्क कमोडिटीज को संभालने की क्षमता बढ़ सकती है। इससे ओडिशा के साथ-साथ झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक कार्गो नेटवर्क मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। Paradip में प्रवेश APSEZ के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी के पास पहले से ही पूर्वी तट पर हल्दिया, धामरा, गोपालपुर और गंगावरम जैसे पोर्ट्स से जुड़ी क्षमता मौजूद है। पारादीप जुड़ने के बाद पूर्वी भारत में उसके पोर्ट नेटवर्क और कार्गो कवरेज को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। कंपनी के मुताबिक पारादीप प्रोजेक्ट के बाद उसका घरेलू पोर्टफोलियो लगभग 671 MMT की क्षमता तक पहुंच सकता है। यह विस्तार 2030 तक 1 अरब टन कार्गो थ्रूपुट के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पारादीप पोर्ट भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार केंद्र है। पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार इसकी पहुंच ओडिशा के अलावा झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े hinterland तक है। पोर्ट पर पहले से कई प्रकार के कार्गो को संभालने की सुविधाएं मौजूद हैं और इसकी कुल रेटेड क्षमता करीब 289 MMT प्रति वर्ष बताई गई है। आने वाले वर्षों में क्षमता बढ़ाने की योजनाएं भी चल रही हैं। नई ड्राई बल्क क्षमता बढ़ने से पूर्वी और मध्य भारत के स्टील, पावर, सीमेंट, माइनिंग तथा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए समुद्री लॉजिस्टिक्स विकल्प मजबूत हो सकते हैं। बड़े पैमाने पर कार्गो को पोर्ट के जरिए लाने-ले जाने से सप्लाई चेन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक कारोबारी प्रभाव परियोजना के निर्माण, संचालन शुरू होने और कार्गो मांग की स्थिति पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, Paradip Mahanadi Terminal Limited का गठन Adani Ports की पारादीप विस्तार योजना में एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट कदम है। नई पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी दो ड्राई बल्क बर्थ के विकास और संचालन पर केंद्रित रहेगी। करीब 18 MMT नई क्षमता, 30 साल की कन्सेशन अवधि और पूर्वी भारत के बड़े औद्योगिक hinterland तक पहुंच को देखते हुए यह परियोजना APSEZ के पोर्ट नेटवर्क के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकती है।नई कंपनी का मुख्य काम क्या होगा?
परियोजना से 18 MMT नई क्षमता जुड़ेगी
30 साल की कन्सेशन अवधि
कोयला, लाइमस्टोन समेत कई कार्गो पर फोकस
पूर्वी भारत में Adani Ports की पकड़ होगी मजबूत
Paradip Port की रणनीतिक अहमियत
औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को मिल सकता है फायदा
निष्कर्ष
Adani Ports ने Paradip में बनाई नई कंपनी, दो Dry Bulk Berths का करेगी विकास और संचालन






