BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

बिहार में तीन तलाक कानून के तहत पहली सजा, नौशाद अहमद को दो साल का कठोर कारावास


पटना, 18 अक्टूबर 2026। बिहार में तत्काल तीन तलाक से जुड़े मामले में पहली बार सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई है। पटना की एक अदालत ने बिहटा थाना क्षेत्र के सिमरी गांव निवासी नौशाद अहमद को अपनी पत्नी को तत्काल तीन तलाक देने और अन्य संबंधित आरोपों में दोषी ठहराते हुए दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले को राज्य में तीन तलाक विरोधी कानून के तहत एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

यह मामला मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत दर्ज हुआ था। इस कानून के अनुसार, तत्काल तीन तलाक की घोषणा अवैध और कानूनी रूप से अमान्य है। कानून का उल्लंघन करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत सजा का प्रावधान है।

शादी के करीब 21 साल बाद सामने आया विवाद

मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नौशाद अहमद और रजिया सुल्तान उर्फ गुड़िया का विवाह 9 नवंबर 2001 को हुआ था। दंपती के तीन बच्चे हैं। शिकायत के मुताबिक, सितंबर 2022 में वैवाहिक विवाद के दौरान नौशाद ने अपनी पत्नी को तत्काल तीन तलाक दिया था।

शिकायत में पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया था। इसके अलावा, पत्नी पर तेजाब फेंकने की कोशिश का आरोप सामने आया था। इन शिकायतों के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

पुलिस जांच के बाद अदालत में पहुंचा मामला

इस प्रकरण में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 31 जुलाई 2023 को आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया गया।

पटना के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-24 राजीव रंजन सहाय की अदालत ने नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 4 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 341 के तहत दोषी पाया। ये प्रावधान क्रमशः तत्काल तीन तलाक, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने और गलत तरीके से रोकने से संबंधित हैं।

अदालत ने इन अपराधों के लिए दो साल के कठोर कारावास और 6,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। रिपोर्टों के मुताबिक, जुर्माना जमा नहीं करने पर एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जुर्माने की राशि शिकायतकर्ता को दिए जाने का भी उल्लेख है।

तेजाब हमले के आरोप से अदालत ने किया बरी

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अदालत ने नौशाद अहमद को पत्नी पर तेजाब फेंकने की कोशिश के आरोप से बरी कर दिया। अदालत को इस आरोप में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।

इससे स्पष्ट होता है कि अदालत ने अलग-अलग आरोपों पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय दिया। तीन तलाक और अन्य संबंधित अपराधों में दोषी ठहराए जाने का फैसला तेजाब हमले के आरोप से अलग है।

बचाव पक्ष हाईकोर्ट में देगा चुनौती

नौशाद अहमद के बचाव पक्ष के वकील ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बचाव पक्ष अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

इसलिए फिलहाल पटना की अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को मौजूदा न्यायिक निर्णय के रूप में देखा जाना चाहिए। आगे की कानूनी प्रक्रिया में उच्च न्यायालय का रुख भी महत्वपूर्ण होगा।

क्या कहता है तीन तलाक विरोधी कानून?

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 का उद्देश्य तत्काल तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगाना और मुस्लिम विवाहित महिलाओं के कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है। इस कानून के तहत तत्काल तीन तलाक को शून्य और अवैध माना गया है। इसके उल्लंघन पर पति को अधिकतम तीन साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।

कानून के तहत पीड़ित महिला के लिए कुछ अन्य अधिकारों और राहतों का भी प्रावधान है। हालांकि, प्रत्येक मामले में शिकायत, जांच, उपलब्ध साक्ष्य और अदालत के निर्णय के आधार पर कानूनी कार्रवाई तय होती है।

महिलाओं के अधिकारों और कानूनी जवाबदेही पर चर्चा

पटना की अदालत का यह फैसला बिहार में तत्काल तीन तलाक से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चा का विषय बना है। यह मामला दिखाता है कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच, अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और न्यायिक सुनवाई किस तरह फैसले तक पहुंचते हैं।

अब इस मामले में बचाव पक्ष की संभावित अपील पर नजर रहेगी। अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर मौलिक शब्दों में तैयार किया गया है। प्रकाशन से पहले अदालत के आधिकारिक आदेश, सजा के विवरण और अपील की वर्तमान स्थिति की पुष्टि कर लें।