पटना: राजधानी पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र में 3 अक्टूबर 2026 को एक सेवानिवृत्त इंजीनियर की गोली लगने से मौत का मामला सामने आया था। उनका शव फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में खड़ी कार की ड्राइविंग सीट पर मिला। घटनास्थल के पास से पिस्टल और इस्तेमाल किया जा चुका कारतूस मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह आत्महत्या थी या किसी आपराधिक वारदात का परिणाम। पुलिस के मुताबिक, राजीव नगर के फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में एक कार काफी देर तक खड़ी थी। सुबह इसकी सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची टीम ने कार की ड्राइविंग सीट पर एक व्यक्ति को मृत पाया। मृतक की पहचान आलोक कुमार के रूप में हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी उम्र करीब 67 वर्ष थी और वह झारखंड में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी CCL में जनरल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस और परिजनों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार आलोक कुमार कुछ दिन पहले पटना पहुंचे थे। बताया गया है कि वह राजीव नगर के फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में अपनी बहन से मिलने आए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, वह रांची में रहते थे और मूल रूप से मोतिहारी के रहने वाले थे। घटना से पहले उनके पटना आने और यहां रहने की परिस्थितियों की भी पुलिस जानकारी जुटा रही है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि आलोक कुमार को सिर/कनपटी के पीछे गोली लगी थी। कार के पास पुलिस को एक पिस्टल और एक खाली कारतूस भी मिला। हालांकि, केवल हथियार मिलने से यह तय नहीं होता कि गोली उसी हथियार से चली थी या घटना किस परिस्थिति में हुई। इसी कारण पुलिस ने हथियार और अन्य साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी FSL की टीम को मौके पर बुलाया गया। टीम ने कार और आसपास के क्षेत्र की जांच कर जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस अब बरामद हथियार, कारतूस और घटनास्थल से मिले अन्य संभावित सबूतों की वैज्ञानिक जांच करा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट इस मामले में गोली चलने की परिस्थितियों को समझने में अहम भूमिका निभा सकती है। पुलिस अभी किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। शुरुआती परिस्थितियों को देखते हुए आत्महत्या की संभावना की भी जांच की जा रही है, जबकि मृतक के एक रिश्तेदार ने हत्या की आशंका जताई है। पुलिस का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को मिलाकर ही निकाला जाएगा। जांच टीम फ्रेंड्स कॉलोनी और आसपास के इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आलोक कुमार कार तक कब पहुंचे, उनके आसपास उस समय कौन-कौन लोग मौजूद थे और घटना से पहले उनकी गतिविधियां क्या थीं। CCTV फुटेज से यह भी पता लगाने की कोशिश हो सकती है कि घटनास्थल के आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति या वाहन तो मौजूद नहीं था। पुलिस मृतक के परिवार और उनके परिचितों से भी जानकारी जुटा रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि हाल के दिनों में उनकी किसी व्यक्ति से कोई परेशानी, विवाद या तनाव था या नहीं। हालांकि, ऐसी किसी वजह की पुष्टि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले नहीं की जा सकती। इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं— गोली किस परिस्थिति में चली? बरामद पिस्टल का घटना से सीधा संबंध है या नहीं? कार के आसपास उस समय कौन मौजूद था? क्या CCTV में कोई महत्वपूर्ण सुराग मिला? पोस्टमार्टम और FSL रिपोर्ट क्या संकेत देती है? क्या मृतक की किसी व्यक्ति से हाल में कोई विवाद या संपर्क था? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो पाएंगी। फिलहाल यह मामला संदिग्ध मौत के रूप में जांच के दायरे में है। पुलिस ने हत्या की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया है और आत्महत्या की संभावना को भी जांच से बाहर नहीं किया गया है। इसलिए जब तक फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण पूरा नहीं होता, तब तक किसी एक संभावना को अंतिम सच मानना उचित नहीं होगा। राजीव नगर के फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके में 3 अक्टूबर को रिटायर्ड CCL अधिकारी आलोक कुमार की कार में गोली लगा शव मिलने की घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। घटनास्थल से पिस्टल और खाली कारतूस बरामद हुआ है, जबकि पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों और CCTV फुटेज के आधार पर मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। हत्या या आत्महत्या—अभी दोनों संभावनाओं पर जांच जारी है और अंतिम तस्वीर जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी।कार के अंदर मिला शव
पटना क्यों आए थे आलोक कुमार?
सिर में लगी थी गोली
FSL टीम ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य
हत्या और आत्महत्या दोनों पहलू
CCTV फुटेज भी जांच के दायरे में
परिवार और परिचितों से पूछताछ
जांच से जुड़े कई सवाल
अभी अंतिम निष्कर्ष का इंतजार
निष्कर्ष
राजीव नगर में रिटायर्ड CCL अधिकारी की संदिग्ध मौत, हत्या या आत्महत्या की जांच






