न्यूयॉर्क। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी युद्ध, बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियां, जलवायु परिवर्तन और तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 22 से 28 सितंबर तक चल रही हाई-लेवल वीक में करीब 130 राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान देशों के नेता अपने-अपने राष्ट्रीय मुद्दों के साथ उन वैश्विक समस्याओं पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिनका प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं है। इस साल की महासभा का विषय है—“Restoring trust, managing transformation: A United Nations that delivers for all”। यानी बदलती दुनिया के बीच अंतरराष्ट्रीय भरोसे को मजबूत करना और ऐसी संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था पर जोर देना, जो सभी देशों के लिए प्रभावी ढंग से काम कर सके। इस महासभा की पृष्ठभूमि में मध्य-पूर्व का सैन्य तनाव सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय सहायता, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने अपने संबोधन में युद्धों को समाप्त करने, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मध्य-पूर्व की स्थिति के साथ-साथ समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध भी महासभा के प्रमुख विषयों में शामिल है। संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने से यूरोप की सुरक्षा, मानवीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की सहित कई नेता युद्ध, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समर्थन से जुड़े मुद्दे महासभा के मंच पर उठा रहे हैं। दूसरी ओर, रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव महासभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इस मुद्दे की चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सदस्य देश युद्ध के समाधान, नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को लेकर अपने अलग-अलग दृष्टिकोण सामने रखते हैं। महासभा में जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय समस्या के रूप में नहीं, बल्कि विकास, वित्त और मानवीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में जलवायु कार्रवाई और Just Transition पर उच्चस्तरीय बैठक भी शामिल है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव, विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त और जलवायु प्रभाव झेल रहे समुदायों को सहायता जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। समुद्र के बढ़ते जलस्तर पर भी विशेष चर्चा रखी गई है। छोटे द्वीपीय देशों और समुद्र के किनारे बसे निचले क्षेत्रों के लिए समुद्र का बढ़ता स्तर घरों, बुनियादी ढांचे और पेयजल स्रोतों के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। इस बार की महासभा में Artificial Intelligence यानी AI भी पहले से अधिक प्रमुख विषयों में शामिल है। AI का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, विज्ञान और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसके साथ गलत सूचना, साइबर सुरक्षा, स्वायत्त हथियार, डेटा सुरक्षा और तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे सवाल भी सामने आए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अपने अंतिम महासभा उद्घाटन संबोधन में AI के जोखिमों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा उपाय और निगरानी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने AI विकसित करने वाले देशों और कंपनियों के बीच सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा करने और परीक्षण-आकलन में सहयोग की बात कही। AI के वैश्विक नियमन को लेकर देशों के बीच पूरी तरह समान दृष्टिकोण नहीं है। एक तरफ कुछ देश तकनीकी विकास को तेज रखने पर जोर देते हैं, जबकि दूसरी ओर AI के संभावित जोखिमों के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और निगरानी की मांग बढ़ रही है। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि AI के विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए और क्या इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा नियम तैयार किए जा सकते हैं। महासभा में Sustainable Development Goals यानी SDGs की प्रगति पर भी चर्चा हो रही है। 2030 तक गरीबी, भुखमरी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी और ऊर्जा से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में दुनिया कितनी आगे बढ़ी है, इसका आकलन भी एजेंडे का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मौजूदा वैश्विक संकटों के बीच विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। युद्ध और आर्थिक अस्थिरता का प्रभाव कई देशों की विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है। भविष्य में किसी नई महामारी या बड़े स्वास्थ्य संकट से निपटने की तैयारी भी महासभा के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। कोविड-19 के अनुभव के बाद देशों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, चिकित्सा संसाधनों और आपातकालीन प्रतिक्रिया में सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की हाई-लेवल वीक में महामारी की तैयारी से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन सभी संकटों के बीच संयुक्त राष्ट्र की अपनी भूमिका भी चर्चा में है। दुनिया में बढ़ते संघर्ष और देशों के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए सामूहिक निर्णय लेना कठिन हो रहा है। महासचिव गुतारेस ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक संस्थाएं आज की शक्ति-संरचना के अनुरूप खुद को ढालने की चुनौती का सामना कर रही हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। 81वां महासभा सत्र संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के कार्यकाल का अंतिम महासभा सत्र भी है। उनका दूसरा और अंतिम कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। इसके बाद 2027 की शुरुआत में नया महासचिव पद संभालेगा। इस वजह से मौजूदा महासभा सत्र संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान दिशा और भविष्य की प्राथमिकताओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर मुख्य रूप से चार बड़े क्षेत्रों पर बनी हुई है—मध्य-पूर्व में संघर्ष और समुद्री सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, जलवायु परिवर्तन और AI का भविष्य। इनके अलावा गरीबी, असमानता, मानवीय सहायता, परमाणु निरस्त्रीकरण, महामारी की तैयारी और सतत विकास जैसे विषय भी महासभा की चर्चाओं में शामिल हैं। न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं हाई-लेवल वीक में दुनिया के सामने मौजूद कई जटिल चुनौतियां एक साथ चर्चा में हैं। मध्य-पूर्व और यूक्रेन के युद्धों से लेकर जलवायु परिवर्तन, AI, स्वास्थ्य सुरक्षा और सतत विकास तक, देशों के प्रतिनिधि अलग-अलग मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रख रहे हैं। करीब 130 राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्षों की मौजूदगी इस बैठक के वैश्विक महत्व को दर्शाती है। अब इस महासभा से निकलने वाली चर्चाओं और कूटनीतिक पहलों पर नजर रहेगी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन साझा चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह के सहयोग और व्यावहारिक कदमों पर आगे बढ़ता है।मध्य-पूर्व का संघर्ष बना प्रमुख मुद्दा
यूक्रेन युद्ध भी चर्चा के केंद्र में
जलवायु संकट पर भी बड़ा फोकस
AI को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता
AI को लेकर देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण
सतत विकास लक्ष्य भी एजेंडे में
महामारी और वैश्विक स्वास्थ्य
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल
इस सत्र की एक और खासियत
दुनिया की नजर किन मुद्दों पर?
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के बड़े संकटों पर मंथन, मध्य-पूर्व से AI तक कई मुद्दे एजेंडे में





