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देवघर में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान, कई थाना क्षेत्रों में छापेमारी


देवघर: झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। साइबर थाना की टीम ने जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर साइबर गतिविधियों में संलिप्तता के संदेह में कई लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बीच कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं।

कई इलाकों में एक साथ कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराध से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर अलग-अलग स्थानों को चिन्हित कर छापेमारी की गई। हालिया कार्रवाई में सारठ थाना क्षेत्र में भी साइबर और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। इस दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इससे पहले जिले के मधुपुर, पत्थरडा और सारठ क्षेत्रों में भी एक साथ कार्रवाई की गई थी, जिसमें संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनके मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच शुरू की गई थी।

मोबाइल और सिम कार्ड की जांच

पुलिस की कार्रवाई में मोबाइल फोन और सिम कार्ड अहम सुराग के तौर पर सामने आए हैं। हालिया गिरफ्तारी में पुलिस ने पांच मोबाइल फोन और आठ सिम कार्ड बरामद करने की जानकारी दी है। प्रारंभिक तकनीकी जांच में इन उपकरणों से कथित साइबर ठगी से जुड़े संकेत मिलने की बात पुलिस ने कही है।

जांच एजेंसियां मोबाइल में मौजूद कॉल डिटेल, नंबरों, डिजिटल गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं, ताकि कथित नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।

फर्जी कस्टमर केयर बनकर ठगी का आरोप

पुलिस के अनुसार, कुछ संदिग्ध लोगों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान सेवाओं के फर्जी कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर संपर्क करने के आरोप में पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि कथित तौर पर Flipkart, Amazon Pay, Airtel Payment Bank और PhonePe जैसी सेवाओं के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को विश्वास में लेने की कोशिश की जाती थी।

ऐसे मामलों में अपराधी ग्राहक सहायता के नाम पर फोन या मैसेज कर सकते हैं और समस्या दूर करने के बहाने संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

सरकारी योजनाओं के नाम पर भी ठगी की जांच

पुलिस ने यह भी बताया है कि कुछ मामलों में PM-Kisan जैसी सरकारी योजनाओं का नाम इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन गतिविधियों के पीछे कितने लोग जुड़े हैं और कथित तौर पर ठगी का दायरा किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

पहले भी हुई हैं साइबर अपराधियों पर कार्रवाइयां

देवघर में सितंबर के दौरान साइबर अपराध के खिलाफ कई चरणों में पुलिस कार्रवाई सामने आई है। अलग-अलग अभियानों में फर्जी कस्टमर केयर और सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगी के आरोपों से जुड़े संदिग्धों को पकड़ा गया है। कुछ मामलों में पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल सामग्री जब्त कर तकनीकी जांच शुरू की।

तकनीकी जांच से नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश

साइबर अपराध के मामलों में पुलिस केवल मौके से हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ तक सीमित नहीं रहती। जब्त मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जांच के जरिए संपर्क में रहे नंबरों, डिजिटल लेनदेन और संभावित पीड़ितों से जुड़े डेटा की पड़ताल की जा सकती है।

देवघर पुलिस की मौजूदा कार्रवाई में भी इसी तरह के डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित साइबर नेटवर्क की कड़ियां तलाशने की प्रक्रिया जारी है।

गिरफ्तारी का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं

यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने का अर्थ अदालत में उसका दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम रूप से अपराध और जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

निष्कर्ष

देवघर में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। जिले के कई थाना क्षेत्रों में छापेमारी, संदिग्धों से पूछताछ और डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है। हालिया कार्रवाई में पांच लोगों की गिरफ्तारी और मोबाइल-सिम की बरामदगी की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कथित साइबर नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।