चक स्कूल भवन की लागत, निर्माण एजेंसी और उपयोगिता की हो जांच : रामदेव यादव
दोषी पाए जाने पर संवेदक व अभियंता पर एफआईआर की हो कार्रवाई, मुख्यमंत्री व उपायुक्त से जांच की मांग
मेदिनीनगर। पलामू के चक स्थित उत्क्रमित राजकीयकृत +2 उच्च विद्यालय के भवन की वर्तमान स्थिति एवं इसके निर्माण से जुड़े सरकारी अभिलेखों की जांच की मांग झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश समन्वयक एवं पलामू कांग्रेस के अग्रणी संगठनों के प्रभारी, वरिष्ठ अधिवक्ता रामदेव प्रसाद यादव ने की है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री एवं उपायुक्त को पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
रामदेव प्रसाद यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के उद्देश्य से सरकारी राशि से निर्मित विद्यालय भवन की लागत, निर्माण एजेंसी, स्वीकृत राशि, भुगतान और वर्तमान उपयोगिता की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन के निर्माण और वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाने के बजाय प्रशासन को सरकारी दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय भवन का निर्माण वर्ष 2012 के आसपास हुआ है तो उसकी प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यादेश, मापी पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, भुगतान विवरण तथा कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र की जांच होनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि भवन निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना भुगतान हुआ और निर्माण कार्य किस विभाग, एजेंसी अथवा संवेदक के माध्यम से कराया गया।
नामांकन और उपस्थिति का भी हो सत्यापन
रामदेव यादव ने वर्ष 2012 से अब तक विद्यालय में हुए छात्र नामांकन एवं वास्तविक उपस्थिति का वर्षवार सत्यापन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि नामांकन पंजी, उपस्थिति पंजी, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड तथा पीएम पोषण योजना के आंकड़ों का मिलान किया जाए, ताकि विद्यालय में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति की स्थिति सामने आ सके।
भवन की तकनीकी जांच की मांग
उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय भवन की वर्तमान स्थिति जर्जर है तो प्रशासन को विशेषज्ञों एवं अभियंताओं की टीम से इसका तकनीकी निरीक्षण कराना चाहिए। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि भवन की स्थिति सामान्य रखरखाव के अभाव, समय पर मरम्मत नहीं होने अथवा किसी तकनीकी कारण से प्रभावित हुई है।
रामदेव यादव ने वर्ष 2012 से अब तक भवन की मरम्मत एवं रखरखाव पर खर्च हुई राशि का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी योजना की सफलता केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होती। भवन का नियमित उपयोग, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, कक्षाओं का संचालन और परिसंपत्ति का उचित रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने मुख्यमंत्री एवं उपायुक्त से पूरे मामले की वित्तीय और तकनीकी जांच कराने, आवश्यकतानुसार स्थल निरीक्षण कराने तथा जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी प्रमाणित होने पर संबंधित संवेदक एवं अभियंता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
रामदेव प्रसाद यादव ने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था को पहले से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सरकारी राशि से निर्मित परिसंपत्ति की वास्तविक स्थिति और उसके उपयोग को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी जांच से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की सही तस्वीर सामने आएगी और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।





