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विचार अलग हो सकते हैं, रिश्ते नहीं - हृदयानंद मिश्र।


हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड झारखंड सरकार एवं सदस्य कोऑर्डिनेशन कमिटी झारखंड प्रदेश कांग्रेस हृदयानंद मिश्र ने 
 पलामू प्रमंडल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष एवं आत्मीय  छोटे भाई श्री आनंद शंकर जी से उनके आवास पर जाकर स्वास्थ्य का कुशल-क्षेम जाना।
गंभीर बीमारी से चिकित्सकों की दवा और लोगों की दुआओं के सहारे स्वस्थ होकर डाल्टनगंज लौटे आनंद जी से 26 वर्षों बाद आमने-सामने मिलना मेरे लिए भावुक और आत्मीय क्षण था। उन्होंने जिस गर्मजोशी और प्रसन्नता से मेरा स्वागत किया, उसने वर्षों पुरानी आत्मीयता को फिर से जीवंत कर दिया। मेरे साथ मोहम्मद शेर खान एवं संजीव कुमार मिश्रा भी थे।
स्वास्थ्य की चर्चा के बाद बात पहुंची हमारे शहर की ऐतिहासिक और संवैधानिक विरासत तक। मैंने डाल्टनगंज के संविधान सभा के दो गौरवशाली सदस्यों यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष की स्मृति को स्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमाओं की स्थापना तथा उनके नाम पर सड़क और मोहल्लों के नामकरण के अपने प्रयासों की चर्चा की।
आनंद जी ने इस प्रस्ताव का पूरी आत्मीयता से समर्थन किया और कहा कि वे अपनी पत्नी एवं मेयर श्रीमती अरुणा शंकर जी से भी इस विषय में बात करेंगे, ताकि 12 तारीख की नगर निगम की बैठक में इस महत्वपूर्ण विषय को रखा जा सके और आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़े।
हमने मेदिनी राय और डॉ. हामिद की स्मृतियों पर भी चर्चा की—क्योंकि शहर केवल इमारतों से नहीं बनते, वे उन लोगों की स्मृतियों से बनते हैं जिन्होंने उन्हें अपनी सेवाओं और संघर्षों से पहचान दी।
राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता किसी विचारधारा की मोहताज नहीं होती।
रिश्तों की असली खूबसूरती यही है कि मतभेद अपनी जगह रहते हैं और मनुष्यता अपनी जगह।
आनंद जी से आज की मुलाकात ने फिर याद ताजा कर दी कि“विचार अलग हो सकते हैं, रास्ते अलग हो सकते हैं,
लेकिन दिलों में सम्मान हो तो रिश्ते कभी अलग नहीं होते।”
ईश्वर से प्रार्थना है कि आनंद जी पूर्णतः स्वस्थ रहें और लंबे समय तक समाज की सेवा करते रहें।