मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में बहस लगातार तेज हो रही है। इसी बीच अभिनेता आमिर खान ने फिल्मों में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर अपनी राय रखी है। उन्होंने तकनीक को रचनात्मकता बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीक का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। आमिर खान के मुताबिक फिल्म निर्माण में तकनीक का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। समय के साथ सिनेमा में नई तकनीकें आती रही हैं और फिल्मकारों ने उन्हें अपनी कहानी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने के लिए अपनाया है। उनका मानना है कि AI ने फिल्मकारों के लिए कल्पना को दृश्य रूप देने की संभावनाएं काफी बढ़ा दी हैं। जिन दृश्यों या विचारों को पहले तकनीकी सीमाओं के कारण पर्दे पर उतारना मुश्किल होता था, उन्हें अब ज्यादा प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है। आमिर खान ने AI को अपने आप में अच्छा या बुरा मानने के बजाय उसके इस्तेमाल पर जोर दिया। उनका कहना है कि तकनीक का परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि निर्माता और कलाकार उसका उपयोग किस उद्देश्य से करते हैं। यानी अगर AI का इस्तेमाल कहानी, विजुअल इफेक्ट्स और फिल्म की रचनात्मक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जाए, तो यह फिल्म निर्माण के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। लेकिन इसका गलत या गैर-जिम्मेदार इस्तेमाल गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकता है। आमिर खान की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अभिनेत्री जाह्नवी कपूर से जुड़ा एक AI-मॉर्फ्ड वीडियो विवाद चर्चा में है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए एक बदले हुए वीडियो में मूल फिल्मी फुटेज के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई थी। जाह्नवी ने इस तरह के गैर-सहमति वाले कंटेंट को महिलाओं की गरिमा और निजता के लिए गंभीर समस्या बताया। इस मामले के बाद फिल्म इंडस्ट्री में AI के रचनात्मक इस्तेमाल के साथ-साथ उसके दुरुपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। अभिनेता जूनियर एनटीआर समेत कई फिल्मी हस्तियों ने भी ऐसे कंटेंट के खिलाफ आवाज उठाई है। फिल्म निर्माण में AI का इस्तेमाल और किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना बदलकर पेश करना एक ही बात नहीं है। AI का उपयोग विजुअल इफेक्ट्स, प्री-प्रोडक्शन, एडिटिंग, डिजिटल सेट और कई अन्य रचनात्मक कामों में किया जा सकता है। वहीं किसी व्यक्ति की पहचान, चेहरा या आवाज का बिना अनुमति इस्तेमाल करके भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना अलग तरह की चिंता पैदा करता है। भारत सरकार भी AI-generated deepfakes से जुड़े जोखिमों को लेकर कानूनी और प्लेटफॉर्म-जवाबदेही के उपायों पर जोर दे चुकी है। AI के तेजी से विस्तार ने फिल्म निर्माताओं के सामने एक तरफ नई रचनात्मक संभावनाएं खोली हैं, तो दूसरी तरफ कलाकारों की पहचान, सहमति, डिजिटल अधिकार और प्रामाणिकता जैसे सवाल भी खड़े किए हैं। आने वाले समय में फिल्म इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में तकनीकी प्रयोग के साथ स्पष्ट अनुमति, पारदर्शिता और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर नियम और पेशेवर मानक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। आमिर खान की टिप्पणी का मूल संदेश यही है कि AI को केवल डर या विवाद के नजरिए से देखने के बजाय उसके इस्तेमाल के तरीके पर ध्यान दिया जाना चाहिए। तकनीक फिल्मकार को ज्यादा स्वतंत्रता दे सकती है, लेकिन उस स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। निष्कर्ष:आमिर खान ने AI को बताया रचनात्मकता का नया साधन
AI का फायदा तभी, जब इस्तेमाल सही हो
जाह्नवी कपूर के डीपफेक मामले ने बढ़ाई चिंता
AI और डीपफेक में अंतर समझना जरूरी
फिल्म इंडस्ट्री के सामने नई चुनौती
आमिर खान की बात का बड़ा संदेश
AI सिनेमा के लिए कल्पना को नए तरीके से पर्दे पर उतारने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। लेकिन जाह्नवी कपूर से जुड़े डीपफेक विवाद जैसे मामले यह भी दिखाते हैं कि तकनीक का गैर-जिम्मेदार इस्तेमाल व्यक्तिगत गरिमा और अधिकारों के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए आने वाले दौर में फिल्म इंडस्ट्री के लिए क्रिएटिविटी के साथ सहमति, जिम्मेदारी और डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहने वाली है।
AI पर आमिर खान की राय, बोले- तकनीक का इस्तेमाल कैसे होता है, यही सबसे अहम






