जांच रिपोर्ट में 678 में से सिर्फ 93 बच्चे मिले, दर्जनों फर्जीवाड़े का खुलासा,फिर भी कार्रवाई के नाम पर केवल ‘खानापूरी’ क्यों?
पटना(बिहार)।शिक्षा विभाग में सुधार और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलने वाला एक गंभीर मामला जमुई जिले के झाझा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू बाराजोर से सामने आया है।जिला कार्यक्रम पदाधिकारी(स्थापना शिक्षा),जमुई(शोभा कान्त)द्वारा 04 अक्टूबर 2026 को किए गए औचक निरीक्षण में विद्यालय की जो भयावह तस्वीर उभरी थी,उसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया था।परंतु,इस गंभीर रिपोर्ट और स्पष्टीकरण नोटिस के जारी होने के बाद काफी समय बीत जाने पर भी कोई ठोस या कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई न होना अब शिक्षा विभाग की कार्यशैली और मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
•निरीक्षण में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा और लापरवाही की मुख्य बातें•
•छात्रों की फर्जी उपस्थिति(678 में से केवल 93 मिले)•
विद्यालय में कुल 678 बच्चे नामांकित हैं,लेकिन निरीक्षण के दिन मौके पर सिर्फ 93 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। उपस्थिति पंजी में फर्जी और अत्यधिक उपस्थिति दर्ज की जा रही थी,जो सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं में बड़े घोटाले और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ की ओर इशारा करता है।
•शिक्षकों की मनमानी और अनुपस्थिति•
निरीक्षण के दौरान कई शिक्षक(जैसे मो०आमिर हुसैन अंसारी,मो०ओवेस अख्तर)उपस्थिति दर्ज करके गायब/अनुपस्थित पाए गए।वहीं कई अन्य शिक्षक(मो०मुस्तकी अंसारी,मो०तबरेज आलम,नुसरत प्रवीण, पूजा कुमारी)पूरी तरह अनुपस्थित मिले। उपस्थित शिक्षकों के पास पाठ टीका तक संधारित नहीं था।
•पंजी संधारण में भारी गड़बड़ी•
वर्ग-1 की उपस्थिति पंजी में अक्टूबर 2026 के स्थान पर अगस्त माह दर्ज पाया गया।वहीं अगस्त से सितम्बर 2026 तक उपस्थिति दर्ज ही नहीं की गई थी। वित्तीय पंजी मांगने पर अधिकारियों को दिखाई ही नहीं गई।
•गुणवत्ता और स्वच्छता का बुरा हाल•
कॉपियों के मूल्यांकन के बाद बच्चों को न दिखाए जाने और उत्तर-पुस्तिकाओं की गलत चेकिंग की बात सामने आई।विद्यालय में शौचालय अत्यंत गंदा था और पूरे परिसर में घास व गंदगी का अंबार लगा था।
•48 घंटे की मोहलत बीतने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने का क्या मतलब है?•
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र(ज्ञापांक 2521)में स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं संबंधित शिक्षक 48 घंटे के भीतर बिंदुवार स्पष्टीकरण उपलब्ध कराएं।चेतावनी दी गई थी कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर एकतरफा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।लेकिन इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी किसी पर कोई सख्त अनुशासनात्मक •गाज न गिरना कई गंभीर सवाल पैदा करता है•
कार्रवाई में सुस्ती या 'सेटिंग-गेम'?इतने बड़े पैमाने पर फर्जी उपस्थिति और शिक्षकों की अनुपस्थिति के बावजूद सख्त विभागीय या कानूनी कार्रवाई(जैसे निलंबन या एफआईआर) न होना यह दर्शाता है कि मामले को ठंडे बस्ते में डालने या लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है।
•शिक्षकों की मनमानी को मूक सहमति•
जब इतने बड़े फर्जीवाड़े और बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के उल्लंघन के बाद भी सिर्फ कागजी नोटिस देकर मामला शांत कर दिया जाता है,तो इससे दोषी कर्मचारियों का मनोबल और बढ़ता है।
•बच्चों के भविष्य और सरकारी खजाने से खिलवाड़•
फर्जी नामांकन और फर्जी उपस्थिति के आधार पर मिड-डे मील, पोशाक,और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं की राशि के दुरुपयोग की प्रबल संभावना रहती है।इसके बाद भी सुस्त रवैया अपनाना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
•जनता और अभिभावकों का उठ रहा गुस्सा•
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि जब जिला स्तर के आला अधिकारी खुद आकर इतनी बड़ी गड़बड़ियां पकड़ते हैं और फिर भी महीनों तक कोई ठोस बदलाव या सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिलती,तो आम जनता का शिक्षा विभाग से विश्वास उठने लगता है। लोगों की मांग है कि इस मामले में अविलंब उच्चस्तरीय हस्तक्षेप हो और दोषी शिक्षकों एवं अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।इस संबंध में संबंधित अधिकारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन को रिसीव नहीं किया।






