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फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों को लेकर हाई अलर्ट, 70 हजार पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी जवान होंगे तैनात; हिंसा और तोड़फोड़ रोकने के लिए सुरक्षा घेरा मजबूत


पेरिस। फ्रांस में शनिवार, 7 नवंबर को प्रस्तावित देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत करने का फैसला किया है। देशभर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 70 हजार पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी जवानों की तैनाती की योजना बनाई गई है। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नूनेज ने सुरक्षा तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रशासन किसी भी तरह की हिंसा, लूटपाट या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा।

पिछले कई सप्ताह से फ्रांस के अलग-अलग शहरों में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शनिवार को भी ट्रेड यूनियनों, छात्र संगठनों और अन्य विरोध समूहों के सड़कों पर उतरने की संभावना है।

70 हजार सुरक्षाकर्मियों की होगी तैनाती

गृह मंत्रालय की योजना के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों और संवेदनशील इलाकों में लगभग 70 हजार पुलिसकर्मी तथा जेंडरमेरी जवान तैनात रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था में मोबाइल पुलिस इकाइयों, विशेष बलों और निगरानी टीमों को भी शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त जेंडरमेरी के 25 सेंटॉर बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले विशेष वाहन भी तैयार रखे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को संवेदनशील क्षेत्रों में भेजने की व्यवस्था की गई है।

हिंसा और तोड़फोड़ की आशंका से प्रशासन सतर्क

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नूनेज के अनुसार, सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे संदेश सामने आए हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की अपील की गई है। इससे प्रशासन ने संभावित हिंसक गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है।

अधिकारियों को आशंका है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच कुछ कट्टरपंथी समूह घुसकर तोड़फोड़, आगजनी और दुकानों में लूटपाट जैसी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। इसी कारण प्रदर्शन स्थलों, प्रमुख सरकारी भवनों और व्यावसायिक क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई जा रही है।

येलो वेस्ट आंदोलन ने भी बढ़ाई चुनौती

शनिवार के प्रदर्शनों में येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर भी प्रशासन की नजर है। इस आंदोलन से जुड़े कुछ समूहों ने पेरिस के प्लेस डे ला कॉनकॉर्ड इलाके में अलग से प्रदर्शन करने की अपील की है, जबकि अधिकारियों ने प्रस्तावित सभा पर प्रतिबंध लगाया है।

प्रशासन को आशंका है कि प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शन करने की कोशिश से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

महंगाई और वेतन वृद्धि को लेकर नाराजगी

फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों के पीछे आम लोगों की आर्थिक परेशानियां प्रमुख कारण हैं। बढ़ती महंगाई, घरेलू खर्च, वेतन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर श्रमिक संगठनों तथा छात्र समूहों में असंतोष है।

प्रदर्शनकारी न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी, कर्मचारियों के वेतन में सुधार, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और सार्वजनिक सेवाओं के लिए अधिक सरकारी निवेश की मांग कर रहे हैं।

पेरिस समेत प्रमुख शहरों में बढ़ाई गई निगरानी

सुरक्षा एजेंसियों ने पेरिस के अलावा अन्य बड़े शहरों में भी सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की तैयारी की है। रेलवे स्टेशनों, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों, सरकारी कार्यालयों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी।

प्रशासन ने प्रदर्शन आयोजकों के साथ संपर्क बनाए रखने और जुलूसों के सुरक्षित मार्ग निर्धारित करने पर भी जोर दिया है, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ सार्वजनिक व्यवस्था भी कायम रखी जा सके।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

फ्रांस सरकार के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, बढ़ती महंगाई और आर्थिक परेशानियों को लेकर जनता की नाराजगी का समाधान करना और दूसरी, विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने से रोकना।

गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति होगी, लेकिन हिंसा और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल 7 नवंबर के प्रदर्शनों को लेकर पूरे फ्रांस में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। शनिवार को होने वाली गतिविधियों पर सरकार और प्रशासन की विशेष नजर रहेगी।