न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हुई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने देशों से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए स्पष्ट तथा विश्वसनीय राष्ट्रीय योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं में बदलाव की समयसीमा के साथ प्रभावित श्रमिकों और समुदायों के लिए सुरक्षा उपाय भी शामिल होने चाहिए। गुतारेस का जोर इस बात पर रहा कि जलवायु लक्ष्यों को केवल दीर्घकालिक घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। देशों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था की ओर किस गति से और किन चरणों में आगे बढ़ेंगे। UN के अनुसार राष्ट्रीय योजनाओं को पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य के अनुरूप रखने की आवश्यकता है। इसके लिए उत्सर्जन में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में आयोजित UN Climate Summit में सरकारों, कारोबार, वित्तीय संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने पर चर्चा की। बैठक में सौर और पवन ऊर्जा सहित उपलब्ध स्वच्छ तकनीकों का बड़े पैमाने पर विस्तार करने तथा ऊर्जा प्रणालियों को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य केवल कार्बन उत्सर्जन घटाना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा, बिजली की विश्वसनीय उपलब्धता और भविष्य की अर्थव्यवस्था को स्थिर आधार देना भी इस बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। तेल, गैस और कोयला लंबे समय से दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था का बड़ा आधार रहे हैं। लेकिन इनके इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान देता है। इसी वजह से जलवायु नीति में ऊर्जा उत्पादन और खपत के तरीके को बदलना महत्वपूर्ण माना जाता है। UN Climate Summit में भी नेताओं ने मौजूदा जलवायु प्रतिबद्धताओं को तेज और प्रभावी कार्रवाई में बदलने की जरूरत पर जोर दिया। फॉसिल फ्यूल से Renewable Energy की ओर बदलाव का असर केवल ऊर्जा कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। कोयला खनन, तेल-गैस उत्पादन और उनसे जुड़े उद्योगों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों तथा उन पर निर्भर समुदायों के लिए यह परिवर्तन आर्थिक बदलाव ला सकता है। इसी कारण गुतारेस ने देशों से ऐसी योजनाएं बनाने को कहा है जिनमें प्रभावित श्रमिकों और समुदायों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए। इसे Just Transition यानी न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण की अवधारणा से जोड़ा जाता है। स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने के लिए केवल नीतिगत बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे। सौर और पवन परियोजनाओं, बिजली ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क और जलवायु अनुकूलन के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी। UN Climate Summit में जलवायु वित्त को भी प्रमुख चर्चा का विषय बनाया गया। संयुक्त राष्ट्र ने विकसित और विकासशील देशों के बीच वित्तीय सहयोग बढ़ाने को ऊर्जा संक्रमण तथा जलवायु कार्रवाई की महत्वपूर्ण शर्तों में शामिल किया। Renewable Energy का विस्तार अपने साथ एक तकनीकी चुनौती भी लाता है। सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम और समय के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अधिक Renewable Power को राष्ट्रीय बिजली व्यवस्था में शामिल करने के लिए आधुनिक ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और बेहतर ट्रांसमिशन क्षमता की जरूरत होगी। UN के 2026 Climate Summit में Global Grids Accelerator जैसी पहलों को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य ऊर्जा संक्रमण के लिए आवश्यक बिजली नेटवर्क को मजबूत करना है। हाल के वर्षों में ऊर्जा कीमतों और वैश्विक संघर्षों ने यह सवाल भी उठाया है कि देशों की ऊर्जा व्यवस्था कितनी सुरक्षित और विविध है। Renewable Energy का विस्तार कई देशों के लिए घरेलू स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ाने और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का एक विकल्प हो सकता है। इसी वजह से स्वच्छ ऊर्जा को अब केवल पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक नीति से जुड़े विषय के रूप में भी देखा जा रहा है। UN महासचिव ने जलवायु कार्रवाई में तेजी की जरूरत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया को तापमान वृद्धि को सीमित करने के लक्ष्य के अनुरूप उत्सर्जन में तेज कमी लानी होगी। इसके लिए आने वाले वर्षों में देशों के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों और वास्तविक नीतियों के बीच अंतर कम करना महत्वपूर्ण होगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि देश UN में व्यक्त किए गए इन आह्वानों को अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा नीतियों में किस तरह लागू करते हैं। इसमें जीवाश्म ईंधन की भूमिका, Renewable Energy की क्षमता, बिजली ग्रिड, निवेश, रोजगार और उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा की कीमत जैसे कई पहलू शामिल होंगे। जलवायु कार्रवाई को तेज करने के साथ यह भी जरूरी होगा कि ऊर्जा संक्रमण आर्थिक रूप से व्यवहारिक रहे और विकासशील देशों को आवश्यक वित्त तथा तकनीकी सहायता उपलब्ध हो। संयुक्त राष्ट्र महासभा और Climate Summit 2026 में जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को लेकर समयबद्ध और व्यावहारिक योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। गुतारेस की अपील का मुख्य संदेश यह है कि जलवायु लक्ष्यों को केवल घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय देशों को स्पष्ट रोडमैप, समयसीमा, निवेश और प्रभावित समुदायों के लिए सुरक्षा उपायों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। आने वाले वर्षों में ऊर्जा संक्रमण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश Renewable Energy, मजबूत बिजली ग्रिड, जलवायु वित्त और रोजगार सुरक्षा को एक साथ किस तरह लागू करते हैं।सिर्फ लक्ष्य नहीं, समयसीमा भी जरूरी
Renewable Energy को तेजी देने की जरूरत
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता क्यों चर्चा में?
ऊर्जा संक्रमण के साथ रोजगार की चुनौती
विकासशील देशों के लिए वित्त महत्वपूर्ण
बिजली के ग्रिड को मजबूत करना भी जरूरी
जलवायु संकट और ऊर्जा सुरक्षा का संबंध
1.5 डिग्री लक्ष्य पर दबाव
आगे क्या होगा?
निष्कर्ष
UN में जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव पर जोर, देशों से समयबद्ध योजना बनाने की अपील






