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तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में ₹4,178 करोड़ की रेलवे परियोजनाएं, 236 किलोमीटर रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी


 दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रेलवे ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से जुड़ी दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब 4,178.13 करोड़ रुपये है। प्रस्तावित कार्यों के जरिए लगभग 236 किलोमीटर रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है। रेलवे के मुताबिक इसका प्रमुख उद्देश्य यात्री और मालगाड़ियों के संचालन को अधिक सुचारु बनाना तथा व्यस्त रेल मार्गों पर क्षमता का विस्तार करना है।

सलेम-करूर-दिंडीगुल रेल लाइन का होगा दोहरीकरण

स्वीकृत परियोजनाओं में सलेम-करूर-दिंडीगुल रेलखंड के 159 किलोमीटर हिस्से का दोहरीकरण शामिल है। इस काम के लिए करीब 2,241.67 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

इस रेलखंड से तमिलनाडु के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों को रेल संपर्क मिलता है। क्षेत्र में स्टील, सीमेंट, कपड़ा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसी आर्थिक गतिविधियां होने के कारण माल ढुलाई के लिहाज से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण माना जाता है।

रेल लाइन के दोहरीकरण से मौजूदा ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो सकती है। इसका फायदा यात्री सेवाओं के साथ मालगाड़ियों को भी मिल सकता है।

अरक्कोनम-रेनिगुंटा कॉरिडोर में तीसरी और चौथी लाइन

दूसरी बड़ी परियोजना अरक्कोनम-रेनिगुंटा रेलखंड पर तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण से संबंधित है। लगभग 77 किलोमीटर लंबे इस कार्य की अनुमानित लागत 1,936.46 करोड़ रुपये है। यह कॉरिडोर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच महत्वपूर्ण रेल संपर्क प्रदान करता है।

इस मार्ग पर अतिरिक्त लाइनें बनने से ट्रेनों को एक-दूसरे के पीछे लंबे समय तक इंतजार करने की स्थिति कम करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से व्यस्त यात्री और माल परिवहन वाले हिस्सों में अतिरिक्त ट्रैक रेल संचालन के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराते हैं।

कुल 236 किलोमीटर रेल क्षमता में विस्तार

दोनों परियोजनाओं को मिलाकर लगभग 236 किलोमीटर रेल नेटवर्क से जुड़ा काम किया जाएगा। रेलवे की योजना के अनुसार इसका उद्देश्य मौजूदा नेटवर्क पर बढ़ते यातायात को संभालने की क्षमता बढ़ाना है।

रेलवे नेटवर्क में किसी मार्ग पर दोहरीकरण या अतिरिक्त लाइन बनने से अलग-अलग दिशाओं में ट्रेनों को संचालित करने के लिए ज्यादा ट्रैक उपलब्ध होते हैं। इससे परिचालन योजना बनाने में रेलवे को अधिक लचीलापन मिल सकता है।

माल ढुलाई के लिए भी महत्वपूर्ण

दक्षिण भारत के इन रेल कॉरिडोरों का महत्व केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। कई औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों से माल को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में रेलवे की भूमिका महत्वपूर्ण है।

अतिरिक्त रेल क्षमता बनने पर मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी ज्यादा अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्रों, उत्पादन केंद्रों और बाजारों के बीच लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

पहले से चल रही है मल्टी-ट्रैकिंग की व्यापक योजना

इन दोनों परियोजनाओं को रेलवे के व्यापक मल्टी-ट्रैकिंग कार्यक्रम के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। सितंबर 2026 में केंद्र सरकार ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में कुल करीब 540 किलोमीटर के पांच मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को लगभग 10,021 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी थी। इनमें अरक्कोनम-रेनिगुंटा की तीसरी और चौथी लाइन तथा सलेम-करूर-दिंडीगुल दोहरीकरण भी शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश में रेल विस्तार का बड़ा नेटवर्क

आंध्र प्रदेश में पहले से ही कई रेल परियोजनाएं चल रही हैं। रेलवे मंत्रालय के जुलाई 2026 के आधिकारिक विवरण के अनुसार, राज्य में 42 परियोजनाएं, जिनमें नई लाइन और दोहरीकरण के काम शामिल हैं, कुल 4,768 किलोमीटर की लंबाई से संबंधित हैं और इनकी अनुमानित लागत ₹77,855 करोड़ बताई गई थी। मार्च 2026 तक इनमें से 1,465 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा हो चुका था।

इससे पता चलता है कि नई स्वीकृत परियोजनाएं दक्षिण भारत में रेल क्षमता बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा हैं।

तमिलनाडु में भी रेल ढांचे पर जोर

तमिलनाडु में रेलवे के लिए वित्तीय आवंटन और नेटवर्क विस्तार पर भी लगातार काम किया जा रहा है। फरवरी 2026 में रेल मंत्रालय ने बताया था कि राज्य के लिए 2026-27 में रेलवे का बजट आवंटन 7,611 करोड़ रुपये तक पहुंचा है। राज्य में कई स्टेशनों के पुनर्विकास और रेल परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।

हालांकि, रेलवे परियोजनाओं की रफ्तार केवल मंजूरी और बजट पर निर्भर नहीं करती। भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य, स्थानीय परिस्थितियां और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसे मुद्दे भी परियोजना पूरी होने की समयसीमा को प्रभावित कर सकते हैं।

यात्रियों को क्या फायदा हो सकता है?

परियोजनाएं पूरी होने के बाद इन व्यस्त मार्गों पर रेल परिचालन की क्षमता बढ़ने की संभावना है। अतिरिक्त ट्रैक मिलने से रेलवे को ट्रेनों की समय-सारणी तैयार करने और अलग-अलग सेवाओं को संचालित करने में ज्यादा सुविधा मिल सकती है।

इसके साथ ही, बढ़ती मांग वाले क्षेत्रों में भविष्य में अतिरिक्त यात्री सेवाओं के लिए भी बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजनाओं के पूरा होने और नए ट्रैक के परिचालन में आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

निष्कर्ष

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से जुड़े इन दो रेल प्रोजेक्ट्स के लिए ₹4,178.13 करोड़ की मंजूरी दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोरों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बुनियादी ढांचा कदम है। सलेम-करूर-दिंडीगुल खंड का दोहरीकरण और अरक्कोनम-रेनिगुंटा में तीसरी-चौथी लाइन का निर्माण पूरा होने पर यात्री और माल परिवहन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।

इन परियोजनाओं का अंतिम प्रभाव निर्माण की गति, समय पर भूमि और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों तथा निर्धारित समय में नए ट्रैक को परिचालन में लाने पर निर्भर करेगा।