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स्मार्ट मीटर में भारत की अपनी चिप लगाने की तैयारी, 2028 तक लागू हो सकता है नियम


नई दिल्ली। भारत में बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर सरकार अब तकनीक और साइबर सुरक्षा के स्तर पर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। बिजली मंत्रालय की योजना है कि मध्य 2028 तक स्मार्ट मीटरों में भारत में डिजाइन की गई चिप का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाए। इसके बाद देश में निर्मित चिप के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

साइबर सुरक्षा को बताया अहम वजह

बिजली सचिव पंकज अग्रवाल के मुताबिक स्मार्ट मीटर बिजली वितरण व्यवस्था का डिजिटल हिस्सा बन चुके हैं और इनमें बड़ी मात्रा में उपभोक्ता तथा बिजली खपत से जुड़ा डेटा मौजूद रहता है। ऐसे में इन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों की सुरक्षा को लेकर सरकार घरेलू तकनीक विकसित करने पर जोर दे रही है।

सरकार का मानना है कि देश में डिजाइन और निर्माण की क्षमता बढ़ने से विदेशी चिप पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही स्मार्ट मीटर की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चिप के स्तर पर भी नियंत्रण बढ़ेगा।

भारतीय कंपनियां डिजाइन और टेस्टिंग में जुटीं

बिजली सचिव ने बताया कि कुछ चिप डिजाइन कंपनियां और स्मार्ट मीटर निर्माता इस दिशा में काम कर रहे हैं। कुछ चिप पहले से डिजाइन की जा रही हैं, जबकि आगे उनकी टेस्टिंग और वैलिडेशन की प्रक्रिया होगी। सफल परीक्षण के बाद इन्हें व्यावसायिक उत्पादन में ले जाने की योजना है।

सरकार की योजना केवल भारत में चिप डिजाइन करने तक सीमित नहीं है। आगे चलकर भारत में ही निर्मित यानी fabricated chips को भी स्मार्ट मीटरों में इस्तेमाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

करोड़ों स्मार्ट मीटरों से जुड़ा है कार्यक्रम

देश में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना बड़े पैमाने पर चल रही है। रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत राज्यों और बिजली वितरण कंपनियों के प्रस्तावों के आधार पर 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटरों को मंजूरी दी गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक इस योजना के तहत करीब 5.73 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जबकि विभिन्न योजनाओं को मिलाकर देश में कुल स्थापित स्मार्ट मीटरों की संख्या लगभग 7.24 करोड़ थी।

इतने बड़े नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाली चिप की तकनीक और सुरक्षा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि स्मार्ट मीटर बिजली खपत की निगरानी, डेटा संचार और वितरण व्यवस्था के डिजिटल संचालन में भूमिका निभाते हैं।

आयात पर निर्भरता घटाने का भी लक्ष्य

स्मार्ट मीटरों में इस्तेमाल होने वाली चिप फिलहाल बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। घरेलू डिजाइन और निर्माण को बढ़ावा मिलने से सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में सप्लाई चेन को अधिक स्थानीय बनाया जा सकेगा। इससे वैश्विक आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का असर कम करने में भी मदद मिल सकती है।

घरेलू चिप निर्माण से स्मार्ट मीटर बनाने वाली कंपनियों को स्थानीय आपूर्ति मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। सरकार ने संकेत दिया है कि सरकारी खरीद के जरिए इन घरेलू चिप निर्माताओं को बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है, इसलिए अलग से प्रोत्साहन देने की जरूरत सीमित हो सकती है।

स्मार्ट मीटर से आगे सेमीकंडक्टर पर जोर

यह पहल भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत करने की व्यापक कोशिशों से भी जुड़ी है। सरकार ने Semicon 2.0 के तहत चिप डिजाइन, अनुसंधान, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, मशीनरी और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया है।

इसका असर बिजली क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। स्मार्ट मीटर जैसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में घरेलू चिप की मांग पैदा होने से भारतीय चिप डिजाइन और निर्माण कंपनियों के लिए एक नया बाजार विकसित हो सकता है।

बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा पर बढ़ता फोकस

स्मार्ट मीटर में घरेलू चिप की योजना ऐसे समय सामने आई है जब बिजली क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर सरकार का ध्यान बढ़ा है। मंत्रालय की ओर से बिजली व्यवस्था को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए नियमों और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, 2028 का प्रस्तावित लक्ष्य केवल स्मार्ट मीटर बदलने की योजना नहीं है। इसके जरिए सरकार स्मार्ट बिजली नेटवर्क की सुरक्षा, घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता और आयात पर निर्भरता—तीनों मोर्चों पर बदलाव लाने की कोशिश कर रही है।