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चावड़ी बाजार इमारत हादसा: पांच महीने पहले ही पुलिस ने दी थी अवैध निर्माण की सूचना, नगर निगम की निगरानी पर उठे सवाल


नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के व्यस्त चावड़ी बाजार इलाके में इमारत ढहने की घटना के बाद निर्माण कार्यों की वैधता और सरकारी विभागों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, हादसे से करीब पांच महीने पहले ही पुलिस ने संबंधित इमारत में कथित अवैध निर्माण की आशंका को लेकर नगर निगम को पत्र भेजकर सतर्क किया था। इसके बावजूद समय रहते क्या कार्रवाई की गई, यह अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

पहले ही प्रशासन को दी गई थी जानकारी

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने हादसे से कई महीने पहले भवन में हो रहे निर्माण कार्य को लेकर नगर निगम को लिखित सूचना दी थी। इस पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों का ध्यान कथित अनधिकृत निर्माण की ओर आकर्षित किया गया था। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि सूचना मिलने के बाद नगर निगम ने मौके पर निरीक्षण किया था या नहीं और यदि अनियमितताएं पाई गई थीं तो उनके खिलाफ क्या कदम उठाए गए।

हादसे के बाद जवाबदेही पर चर्चा तेज

इमारत गिरने की घटना ने पुराने शहर के उन भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जहां संकरी गलियां, पुरानी संरचनाएं और लगातार होने वाले निर्माण कार्य चुनौती पैदा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने भवनों में बिना तकनीकी जांच के अतिरिक्त मंजिल बनाना, दीवारों में बदलाव करना या मूल ढांचे से छेड़छाड़ करना उनकी मजबूती को प्रभावित कर सकता है।

नगर निगम की भूमिका जांच के दायरे में

इस मामले में पुलिस और नगर निगम के बीच हुए पत्राचार की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि पुलिस की चेतावनी पर संबंधित विभाग ने क्या प्रक्रिया अपनाई, भवन का निरीक्षण हुआ या नहीं और किसी तरह का नोटिस अथवा कार्रवाई की गई थी या नहीं।

पुराने दिल्ली क्षेत्र में भवन सुरक्षा बड़ी चुनौती

चावड़ी बाजार जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बड़ी संख्या में पुराने मकान और व्यावसायिक इमारतें मौजूद हैं। ऐसे क्षेत्रों में नियमित भवन निरीक्षण, निर्माण की अनुमति की जांच और कमजोर इमारतों की पहचान करना बेहद जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर समय रहते कदम नहीं उठाए जाने से भविष्य में भी इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रह सकता है।

इस घटना ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि जब किसी संभावित अवैध निर्माण की जानकारी हादसे से महीनों पहले प्रशासन तक पहुंच गई थी, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी? अब जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसकी जिम्मेदारी किन अधिकारियों की बनती है।