Gulmohur High School की पहल पर जमशेदपुर के सात विद्यालयों का IIT Kharagpur से महत्वपूर्ण शैक्षणिक सहयोग
जमशेदपुर, 6 नवंबर 2026: स्कूली शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों और पारंपरिक कक्षाओं की सीमाओं से आगे ले जाकर नवाचार, उद्यमशीलता और सतत विकास से जोड़ने की दिशा में Gulmohur High School, Jamshedpur ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती प्रीति सिन्हा के नेतृत्व में शहर के सात प्रतिष्ठित विद्यालयों के 12 शिक्षाविदों ने IIT Kharagpur में 3 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय Green Innovation & Sustainability Bootcamp में भाग लिया।
Rajendra Mishra School of Engineering Entrepreneurship (RMSoEE), IIT Kharagpur द्वारा संस्थान के Platinum Jubilee समारोह के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम ने स्कूली शिक्षा, उच्चस्तरीय अनुसंधान, उद्यमिता और सतत नवाचार के बीच एक सार्थक सेतु स्थापित करने की दिशा में नई संभावनाओं के द्वार खोले।
इस पहल में जमशेदपुर के Gulmohur High School, Loyola School, Little Flower School, Hill Top School, Motilal Nehru Public School, J.H. Tarapore School तथा Valley View School के शिक्षाविदों ने सहभागिता की।
इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका सामूहिक दृष्टिकोण रहा। Gulmohur High School ने इस अवसर को केवल अपने शिक्षकों तक सीमित न रखते हुए शहर के अन्य विद्यालयों को भी इससे जोड़ा। इस प्रकार विभिन्न संस्थानों के शिक्षकों एवं शैक्षणिक नेतृत्व को एक साझा मंच पर लाकर आपसी सहयोग, व्यावसायिक विकास और भविष्य की शैक्षणिक साझेदारियों की मजबूत नींव रखी गई।
विशेषज्ञों ने साझा किए नवाचार और वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान
तीन दिवसीय बूटकैंप में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्यमिता विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
IIT Kharagpur के Associate Dean (Innovation & Entrepreneurship), प्रो. मनोज कुमार मंडल ने डिजाइन थिंकिंग, रैपिड प्रोटोटाइपिंग और प्रयोग आधारित नवाचार को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार समस्याओं को नए अवसरों में परिवर्तित कर रचनात्मक समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
प्रो. अविरु कुमार बसु ने पंजाब में विषाक्त जल प्रदूषण जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान से जुड़े शोध एवं नवाचार के उदाहरण प्रस्तुत किए। उनके सत्र ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।
Hanken School of Economics, Finland की Professor of Sustainability and Business Law, प्रो. मृणालिनी कोचुपिल्लई ने ‘आंतरिक सतत विकास’ की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य, आत्मिक संतुलन, दृढ़ता और उद्यमशील रचनात्मकता के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए बताया कि बाहरी दुनिया में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए व्यक्ति का आंतरिक रूप से सशक्त होना भी आवश्यक है।
University of Toyama, Japan के डॉ. गीता एवं डॉ. प्रामाणिक के साथ संवाद ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोणों से परिचित कराया।
वहीं, Fuski Ventures के श्री सौम्यजीत गुहा ने अपनी प्रभावशाली कहानी कहने की शैली और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से उद्यमिता की जटिल अवधारणाओं को अत्यंत सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
इसके अतिरिक्त सर्कुलर इकोनॉमी, हरित उद्यमिता, बाजार परीक्षण, सतत व्यावसायिक मॉडल तथा पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन जैसे विषयों पर आयोजित सत्रों ने प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर दिया कि नवाचारी विचारों को व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधानों में कैसे बदला जा सकता है।
शिक्षकों को नवाचार से जोड़ना ही भविष्य की शिक्षा की कुंजी : प्रीति सिन्हा
इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए Gulmohur High School की प्राचार्या श्रीमती प्रीति सिन्हा ने कहा,
“यदि हम अपने विद्यार्थियों को भविष्य के नवप्रवर्तक, उद्यमी और समस्याओं का समाधान खोजने वाले जिम्मेदार नागरिक बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें अपने शिक्षकों को कक्षाओं की सीमाओं से बाहर निकलकर नवाचार और अनुसंधान का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के अवसर देने होंगे। हमारा उद्देश्य केवल एक बूटकैंप में भाग लेना नहीं था, बल्कि जमशेदपुर के अन्य विद्यालयों के लिए भी ऐसे अवसरों के द्वार खोलना था, ताकि हम सभी मिलकर सीख सकें, सहयोग कर सकें और आगे बढ़ सकें।”
उन्होंने कहा कि स्कूली स्तर पर उद्यमिता का अर्थ केवल व्यवसाय शुरू करना सिखाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, संवेदनशीलता, आलोचनात्मक चिंतन, दृढ़ता और वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।
श्रीमती सिन्हा ने इस अवसर के लिए IIT Kharagpur के RMSoEE की Associate Professor डॉ. प्रभा भोला तथा उनकी शोधार्थियों की पूरी टीम के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम की सुविचारित रूपरेखा, ज्ञानवर्धक सत्रों और आत्मीय आतिथ्य की सराहना की। साथ ही श्री अंकुर गंडोत्रा को विशेष धन्यवाद दिया, जिनकी पहल और प्रयासों से इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक सहयोग की शुरुआत संभव हो सकी।
अब IIT Kharagpur से कक्षाओं तक पहुँचेगा नवाचार का अनुभव
इस तीन दिवसीय बूटकैंप को एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की दीर्घकालिक शैक्षणिक साझेदारी की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले समय में IIT Kharagpur के मार्गदर्शन एवं सहयोग से शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के लिए मेंटरशिप, संयुक्त परियोजनाओं, अनुभवात्मक शिक्षण तथा उद्यमिता और सतत विकास से जुड़ी छात्र-नेतृत्व वाली गतिविधियों की संभावनाएँ तलाशने की योजना है।
इस पहल का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने, नए विचार विकसित करने, प्रयोग करने और समाज तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
Gulmohur High School की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि जब एक विद्यालय नेतृत्व करते हुए अन्य संस्थानों के लिए भी अवसरों के द्वार खोलता है, तो उसका लाभ पूरे शैक्षणिक समुदाय को मिलता है।
IIT Kharagpur में तीन दिनों के इस अनुभव ने जमशेदपुर के विद्यालयों में नवाचार, जिम्मेदार उद्यमिता और सतत विकास की सोच रखने वाली नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक प्रेरणादायक शुरुआत की है।






