झाड़ग्राम (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के चिचिड़ा में भारत जकात माझी परगना महाल की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘चियापाड़ा परबोन’ में सहभागिता की गई। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, कला-संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया गया। इस अवसर पर आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया। ऐसे आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोककलाओं और सामुदायिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ समाज में सांस्कृतिक जागरूकता पैदा करने का माध्यम बनते हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत, पूर्वजों की परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी भाषा, परंपरा, लोककला और सामाजिक मूल्यों को सहेजना आदिवासी समाज के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘चियापाड़ा परबोन’ जैसे सांस्कृतिक आयोजन समाज के लोगों को एक मंच पर लाने, आपसी एकजुटता को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों तक पारंपरिक विरासत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह आयोजन आदिवासी संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और उसके गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
झाड़ग्राम के चिचिड़ा में ‘चियापाड़ा परबोन’ सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए अतिथि, आदिवासी विरासत को सहेजने पर दिया जोर


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