सेल वेज रिवीजन 2017: अवैध MoU के 5 साल पूरे, नियमों की अनदेखी पर तीखा आक्रोश
बीएकेएस का सनसनीखेज आरोप: "प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय और गैर-निर्वाचित नेताओं का बन चुका है 'त्रि-पक्षीय गठबंधन'"
एनजेसीएस के संविधान की उड़ी धज्जियां, मनमाने ढंग से थोपा गया समझौता
अधिकारियों पर मेहरबानी और कर्मचारियों से सौतेला व्यवहार, आंकड़ों से खुली पोल
विशेष संवाददाता / बोकारो:
महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भेदभाव और नियमों के घोर उल्लंघन का मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया है। बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) ने सेल प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय और एनजेसीएस (NJCS) यूनियनों के त्रिपक्षीय गठबंधन पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए हैं। 'वेज रिवीजन 2017' के समझौता ज्ञापन (MoU) के 5 साल पूरे होने पर BAKS ने इसे सिरे से 'अवैध और फर्जी' करार दिया है। संघ का कहना है कि इस पूरे खेल के कारण सेल का हर आम कर्मचारी आज लाखों रुपये के वित्तीय घाटे में है, जबकि जिम्मेदार नेतृत्व पूरी तरह मौन साधे बैठा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नियमों की इस सरेआम अनदेखी पर न तो इस्पात मंत्रालय ने कोई संज्ञान लिया और न ही एनजेसीएस की अन्य यूनियनों ने इसके खिलाफ कोई विरोध दर्ज कराया।
आंकड़ों की जुबानी: अधिकारियों और कर्मचारियों में खुला भेदभाव
BAKS ने पुख्ता आंकड़ों और तथ्यों के साथ सेल प्रबंधन पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है:
MGB (मिनिमम गारंटीड बेनिफिट) में अंतर: जहाँ एक ओर अधिकारियों के 10 साल के वेज रिवीजन में 15% MGB और 35% पर्क्स दिए गए, वहीं भट्टी और मिलों में दिन-रात खून पसीना बहाने वाले कर्मचारियों को महज 13% MGB और 26.5% पर्क्स पर समेट दिया गया।
पर्क्स का एरियर: अधिकारियों को 01 अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2021 तक की अवधि का लाखों रुपये पर्क्स एरियर के रूप में तुरंत भुगतान कर दिया गया। इसके विपरीत, कर्मचारियों के पर्क्स एरियर को 'सरकार की मंजूरी की तिथि' से प्रभावी बनाकर उनके वैध हकों पर सीधा डाका डाला गया।
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'एफोर्डेबिलिटी'का खेल:
बिना किसी लिखित प्रावधान के 'एफोर्डेबिलिटी' (Affordability) जैसा नया शब्द जोड़कर वेज रिवीजन को एक्चुअल और नोशनली अलग-अलग तारीखों से लागू किया गया।
'सब-कमेटी' सिर्फ एक छलावा, 39 महीने का एरियर गायब
संघ ने पर्दाफाश करते हुए कहा है कि बिना किसी अंतिम समझौते (MOA - Memorandum of Agreement) के, सिर्फ एक गैर-कानूनी MoU के दम पर वेज रिवीजन को जबरन थोप दिया गया। समझौते के तहत 39 महीनों के लंबित एरियर के भुगतान के लिए एक 'सब-कमेटी' बनाने का झुनझुना थमाया गया था। लेकिन, 5 साल बीत जाने के बाद भी न तो एरियर की फूटी कौड़ी कर्मचारियों के खाते में आई और न ही उस तथाकथित सब-कमेटी का कोई वजूद सामने आया।
एनजेसीएस की वैधता और नेताओं के अधिकारों पर बड़े सवाल
BAKS ने एनजेसीएस के प्रतिनिधियों के नैतिक अधिकार और संघ के मूल संविधान की धज्जियाँ उड़ाने का गंभीर आरोप लगाया है:
समाप्त कार्यकाल वाले नेता के हस्ताक्षर:
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) की मान्यता प्राप्त यूनियन का कार्यकाल 09 अक्टूबर 2021 को ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद पूर्व लीडर वंश बहादुर सिंह ने 21-22 अक्टूबर 2021 को वेज रिवीजन MoU पर किस अधिकार से हस्ताक्षर किए?
गैर-निर्वाचित प्रतिनिधियों का कब्जा:
बोकारो, भिलाई, दुर्गापुर, एएसपी और सीएफपी जैसी प्रमुख यूनिटों से लगभग 15-21 ऐसे गैर-निर्वाचित नेता कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिन्हें आम कर्मचारियों का कोई जनादेश (Mandate) हासिल ही नहीं है।
संवादहीनता की पराकाष्ठा:
सेल प्रबंधन की मनमानी का आलम यह है कि इतने बड़े विवाद के बावजूद पिछले कुछ सालों में एनजेसीएस की मात्र दो औपचारिक बैठकें (2022 और 2024 में) बुलाई गईं। प्रबंधन संवाद से पूरी तरह भाग रहा है।
"प्रबंधन की कठपुतली बने हैं शेष पक्ष" — हरिओम, महासचिव (BAKS)
"आज सेल कर्मचारियों के शोषण के लिए इस्पात मंत्रालय, सेल प्रबंधन और एनजेसीएस के 20-21 गैर-निर्वाचित नेताओं का समूह एक अनैतिक 'ट्राई-पार्टी गठबंधन' बनाकर काम कर रहा है। सेल प्रबंधन को आर्थिक लाभ पहुँचाने और कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई को दबाने के लिए ये शेष दोनों पक्ष पूरी तरह प्रबंधन की कठपुतली बने हुए हैं।"
— हरिओम, महासचिव (BAKS)
संघ ने जोर देकर कहा है कि 21-22 अक्टूबर 2021 को किया गया यह MoU एनजेसीएस के मूल संविधान के पूरी तरह खिलाफ है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि कोई भी निर्णय सभी यूनियनों और प्रबंधन की 'सर्वसम्मति' से ही लिया जाएगा। बहुमत के आधार पर फैसले लेने की सख्त मनाही के बावजूद इसे जबरन थोपा गया।
बहरहाल,कर्मचारियों में इस भारी आर्थिक नुकसान और शोषण को लेकर उबाल और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर मोड़ पर इस्पात मंत्रालय नींद से जागेगा या फिर सेल कर्मचारी अपने हक और अधिकार के लिए किसी बड़े और उग्र आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने को मजबूर होंगे।
(इनपुट: अलका मिश्रा, बोकारो)
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