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ट्रेन में दो यात्रियों की मौत के मामलों में रोहित तिवारी गिरफ्तार, कई घटनाओं की जांच जारी


पटना/भोजपुर। बिहार में चलती ट्रेन में यात्रियों को निशाना बनाने के आरोपों से जुड़े मामले में रेल पुलिस ने भोजपुर निवासी रोहित तिवारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर अलग-अलग घटनाओं में दो यात्रियों को चलती ट्रेन से नीचे धकेलने और उनकी मौत से जुड़े होने का आरोप है। दोनों घटनाएं आरा-डीडीयू और दानापुर रेल क्षेत्र से जुड़ी बताई गई हैं। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर अन्य संभावित मामलों और उसके संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

पहली घटना में यात्री की मौत

पुलिस के अनुसार, 9 सितंबर 2026 को बिहटा और नेऊरा के बीच दो यात्रियों को चलती ट्रेन से नीचे धकेले जाने की घटना सामने आई थी। इनमें भोजपुर निवासी कैलाश कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद एक अन्य यात्री घायल हुआ।

जांच में पुलिस को संदेह हुआ कि घटना के पीछे वही व्यक्ति हो सकता है, जिसने यात्रियों से पैसे वसूलने के लिए खुद को पुलिस या STF कर्मी बताया था। इस मामले में CCTV और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से संदिग्ध की पहचान करने का प्रयास किया गया।

दूसरी घटना में वैशाली के युवक की मौत

दूसरा मामला सितंबर के अंतिम सप्ताह में सामने आया। पुलिस के अनुसार, वैशाली निवासी 21 वर्षीय नितिन कुमार हैदराबाद से ट्रेन के जरिए अपने घर लौट रहे थे।

परिजनों के मुताबिक, यात्रा के दौरान उनसे संपर्क हुआ और कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताने वाले व्यक्ति ने जुर्माने के नाम पर पैसे की मांग की। बाद में नितिन से संपर्क टूट गया। परिवार की शिकायत के बाद रेल पुलिस ने जांच शुरू की।

आरोपी की निशानदेही पर शव बरामद

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान रोहित तिवारी को बक्सर और वाराणसी के बीच मोहनसराय क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर आरा और जगजीवन हॉल्ट के बीच रेलवे ट्रैक से नितिन कुमार का शव बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है।

पुलिस का दावा है कि पैसे नहीं मिलने के बाद नितिन को चलती ट्रेन से धक्का दिया गया था। इस मामले में हत्या, वसूली और अन्य आरोपों से जुड़े साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

फर्जी पुलिसकर्मी बनकर यात्रियों को निशाना बनाने का आरोप

रेल पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर पैसेंजर ट्रेनों में खुद को पुलिस, RPF या STF का जवान बताकर यात्रियों से पैसे मांगता था। जांच में मजदूरों, युवाओं और अकेले यात्रा करने वाले यात्रियों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, टिकट जांच या धूम्रपान जैसे मामलों में जुर्माना लगाने की बात कहकर यात्रियों से रकम मांगी जाती थी। पैसे नहीं देने पर मारपीट और ट्रेन से नीचे धकेलने जैसे आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

कई रेल घटनाओं को जोड़कर देख रही पुलिस

रोहित तिवारी की गिरफ्तारी के बाद रेल पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके खिलाफ दर्ज या सामने आई अन्य रेल घटनाओं में उसकी वास्तविक भूमिका क्या रही है।

जांच का दायरा आरा, बक्सर, दानापुर और डीडीयू की ओर जाने वाले रेलखंडों तक बताया जा रहा है। पुलिस पुराने मामलों के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर रही है।

बैंक और UPI लेन-देन की भी पड़ताल

पुलिस अब कथित वसूली से जुड़े आर्थिक पहलू की भी जांच कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध बैंक खातों और UPI लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यात्रियों से कथित तौर पर वसूली गई रकम कहां जमा होती थी और क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।

आरोपी के पुराने मामलों की जांच

रेल पुलिस आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। इसके साथ ही पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या पहले हुई अन्य ट्रेन घटनाओं में भी उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद हैं।

फिलहाल दो यात्रियों की मौत से जुड़े मामलों में पुलिस ने उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन अन्य घटनाओं में उसकी भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

यात्रियों की सुरक्षा पर फिर सवाल

इस मामले ने चलती ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा और फर्जी पहचान के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ाई है। खासकर ऐसे यात्रियों के लिए खतरा बढ़ सकता है जो किसी व्यक्ति को पुलिस या रेलवे कर्मचारी समझकर उसके निर्देशों का पालन कर लेते हैं।

रेल यात्रा के दौरान कोई व्यक्ति यदि खुद को पुलिस या RPF अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो उसकी पहचान की पुष्टि करना और तुरंत रेलवे पुलिस को सूचना देना महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

भोजपुर निवासी रोहित तिवारी की गिरफ्तारी के बाद रेल पुलिस दो यात्रियों की मौत से जुड़े मामलों की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस के अनुसार, दोनों घटनाओं में आरोपी की भूमिका सामने आई है और कई अन्य घटनाओं की भी जांच की जा रही है। अब जांच का मुख्य फोकस अन्य संभावित वारदातों, आर्थिक लेन-देन और किसी सहयोगी की भूमिका का पता लगाने पर है। आरोपी पर लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।