पटना: बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के विधानमंडल दल की अहम बैठक 9 अक्टूबर को पटना में बुलाई है। इस बैठक में गठबंधन के विधायक, विधान परिषद सदस्य और सांसद शामिल होंगे। बैठक का मुख्य फोकस आगामी बिहार विधान परिषद चुनाव में NDA की संयुक्त रणनीति, चुनावी समन्वय और गठबंधन के भीतर सामने आ रहे मतभेदों को दूर करने पर रहने की संभावना है। बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। NDA इन चुनावों को एकजुट होकर लड़ने की बात कह रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार भाजपा और जेडीयू चार-चार सीटों पर मैदान में हैं। ऐसे में 9 अक्टूबर की बैठक चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता, उम्मीदवारों के समर्थन में संयुक्त प्रचार और गठबंधन के नेताओं के बीच बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। NDA नेतृत्व की कोशिश यह बताने की है कि चुनाव में सभी सहयोगी दल एक साझा मंच पर हैं। इस चुनाव में NDA के सामने केवल विपक्षी उम्मीदवारों की चुनौती नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलग रुख ने भी समीकरण को जटिल बनाया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में NDA से जुड़े नेताओं द्वारा आधिकारिक उम्मीदवारों के बजाय अन्य प्रत्याशियों के समर्थन की स्थिति सामने आई है। ऐसे मामलों को लेकर गठबंधन ने संबंधित दलों के प्रदेश नेतृत्व को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी देने की बात कही है। उद्देश्य यह है कि मतदान से पहले गठबंधन के भीतर मतों के संभावित बिखराव को रोका जा सके। इससे पहले मुख्यमंत्री आवास पर हुई NDA नेताओं की बैठक में भी विधान परिषद चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में भाजपा, जेडीयू, लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा से जुड़े नेता शामिल हुए। NDA नेताओं की ओर से सार्वजनिक रूप से गठबंधन की एकजुटता पर जोर दिया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी कहा कि गठबंधन चुनाव को मिलकर लड़ रहा है और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 9 अक्टूबर को विधानमंडल दल की बैठक रखी गई है। बिहार विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना और परिणाम आएंगे। 9 अक्टूबर नामांकन वापसी की अंतिम तारीख भी है, इसलिए उसी दिन होने वाली NDA बैठक का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि NDA नेतृत्व गठबंधन के भीतर संभावित असंतोष को किस तरह नियंत्रित करता है और चुनावी मैदान में सभी सहयोगी दलों को एक साथ कैसे सक्रिय करता है। 9 अक्टूबर की बैठक को NDA के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधान परिषद चुनाव में मुकाबला कई क्षेत्रों में बहुकोणीय हो सकता है। आधिकारिक उम्मीदवारों के पक्ष में गठबंधन के वोटों को एकजुट रखना, स्थानीय स्तर के मतभेदों को कम करना और संयुक्त प्रचार अभियान को मजबूत करना NDA की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। निष्कर्ष:विधान परिषद चुनाव पर बनेगी साझा रणनीति
बागियों और असंतुष्ट नेताओं पर भी नजर
सभी सहयोगी दलों के बीच समन्वय पर जोर
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को नतीजे
बैठक क्यों है महत्वपूर्ण?
पटना में 9 अक्टूबर को होने वाली NDA विधानमंडल दल की बैठक बिहार की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों के बीच अहम पड़ाव मानी जा रही है। बैठक के बाद गठबंधन की चुनावी रणनीति, आपसी समन्वय और असंतुष्ट नेताओं को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
9 अक्टूबर को पटना में NDA की बड़ी बैठक, विधान परिषद चुनाव की रणनीति पर होगा मंथन






