BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

राहुल गांधी को मानहानि मामले में बड़ी राहत, सुल्तानपुर की अदालत ने किया बरी


नई दिल्ली/सुल्तानपुर, 27 अक्टूबर 2026। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े वर्ष 2018 के मानहानि मामले में बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित विशेष सांसद-विधायक अदालत ने 26 अक्टूबर को सुनाए गए फैसले में राहुल गांधी को आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान अमित शाह को लेकर की गई उनकी कथित टिप्पणी से संबंधित था।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद मई 2018 में शुरू हुआ था। उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और यह आपराधिक मानहानि की श्रेणी में आता है।

इस मामले में भाजपा के तत्कालीन स्थानीय नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर की अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। इन धाराओं में मानहानि से संबंधित प्रावधान थे।

अदालत ने क्यों किया बरी?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विशेष सांसद-विधायक अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद माना कि शिकायतकर्ता कानूनी रूप से इस मामले में पीड़ित व्यक्ति होने की आवश्यक शर्त पूरी नहीं करते। अदालत के समक्ष यह भी सवाल था कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को कानून के तहत आपराधिक मानहानि माना जा सकता है या नहीं।

रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने शिकायतकर्ता के आरोपों को दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। फैसले में यह भी महत्वपूर्ण रहा कि कथित टिप्पणी मुख्य रूप से अमित शाह और भाजपा से संबंधित थी, जबकि शिकायतकर्ता ने अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का दावा किया था।

इस प्रकार, अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, फैसले की कानूनी व्याख्या करते समय न्यायालय के आदेश में दर्ज निष्कर्षों और उनकी वास्तविक सीमा को ध्यान में रखना आवश्यक है।

सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहे राहुल गांधी

फैसला सुनाए जाने के समय राहुल गांधी स्वयं अदालत में मौजूद थे। मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। वर्ष 2023 में अदालत ने उन्हें पेश होने के लिए समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी अदालत में उपस्थित हुए और उन्हें जमानत मिली।

करीब आठ साल तक चले इस मामले में शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़े साक्ष्यों पर भी विचार हुआ। अंततः अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया।

कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया

अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने राहत व्यक्त की। पार्टी की ओर से न्यायपालिका में विश्वास जताते हुए फैसले का स्वागत किया गया। राहुल गांधी के समर्थकों ने भी अदालत परिसर के बाहर खुशी जाहिर की।

वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से फैसले का अध्ययन करने और आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार करने की बात सामने आई है। यदि इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जाती है, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित पक्षों के कदम और न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी।

क्या इस फैसले का अन्य मामलों पर भी असर पड़ेगा?

राहुल गांधी के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग टिप्पणियों से जुड़े मानहानि के मामले भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि, सुल्तानपुर की अदालत का यह फैसला केवल इसी मामले से संबंधित है। इसे राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे सभी अन्य मामलों में राहत या दोषमुक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उदाहरण के लिए, वर्ष 2023 में मोदी उपनाम से संबंधित टिप्पणी के मामले में गुजरात की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उस दोषसिद्धि पर रोक लगाई थी, जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता बहाल हुई। वह मामला सुल्तानपुर के अमित शाह संबंधी मामले से अलग है।

राजनीतिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

राहुल गांधी को मिली यह राहत ऐसे समय में आई है, जब कांग्रेस और विपक्षी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण सहित विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे माहौल में अदालत का फैसला राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।

हालांकि, किसी न्यायिक फैसले का राजनीतिक प्रभाव अलग विषय है और उसका कानूनी महत्व अदालत के आदेश से निर्धारित होता है। फिलहाल, सुल्तानपुर की अदालत के निर्णय से वर्ष 2018 की कथित टिप्पणी से जुड़ी इस आपराधिक मानहानि कार्यवाही में राहुल गांधी को राहत मिली है।

निष्कर्ष: अमित शाह पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी किए जाने का फैसला उनके लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत है। इस निर्णय को समझने के लिए शिकायतकर्ता की कानूनी पात्रता, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत द्वारा टिप्पणी को मानहानि न मानने से संबंधित निष्कर्ष प्रमुख हैं।