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लगातार बारिश ने रांची के कुम्हारों की बढ़ाई मुश्किलें, त्योहारों की तैयारी पर पड़ा असर


रांची: राजधानी रांची में लगातार हो रही बारिश और बिगड़े मौसम ने मिट्टी के बर्तन तथा देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने वाले कारीगरों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों का मौसम होने के बावजूद बारिश के कारण उनका कामकाज प्रभावित हो रहा है। इससे कुम्हारों और मूर्तिकारों के सामने समय पर ऑर्डर पूरा करने के साथ आर्थिक नुकसान का खतरा भी खड़ा हो गया है।

कारीगरों के लिए बारिश के मौसम में मिट्टी से तैयार सामान को सुखाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। मिट्टी के दीये, घड़े, सजावटी सामान और विभिन्न प्रकार की मूर्तियों को तैयार करने के बाद उन्हें पर्याप्त धूप की जरूरत होती है। लगातार बादल छाए रहने और बारिश होने से तैयार उत्पादों को सूखने में अधिक समय लग रहा है। कई बार नमी के कारण मिट्टी के सामान में दरार आने या उनके खराब होने का खतरा भी बना रहता है।

उत्पादन से लेकर बिक्री तक प्रभावित

मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है। खुले स्थानों पर काम करने वाले कारीगरों को कच्ची मिट्टी सुरक्षित रखने, तैयार मूर्तियों को बारिश से बचाने और कार्यस्थल को व्यवस्थित रखने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। जिन मूर्तियों को रंग-रोगन और सजावट के लिए तैयार किया जाना है, उनके काम में भी देरी हो रही है।

त्योहारों के दौरान मिट्टी के उत्पादों और मूर्तियों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में उत्पादन की गति धीमी होने से कारीगरों को ग्राहकों के ऑर्डर समय पर पूरे करने की चिंता सता रही है। यदि मौसम लंबे समय तक ऐसा ही बना रहा तो इसका सीधा असर उनकी बिक्री और आमदनी पर पड़ सकता है।

आर्थिक नुकसान की चिंता

कुम्हारों और मूर्तिकारों का कारोबार काफी हद तक मौसमी मांग पर निर्भर करता है। त्योहारों के दौरान होने वाली कमाई से ही कई परिवार अपने सालभर के खर्च का प्रबंधन करते हैं। ऐसे में कारोबार के सबसे महत्वपूर्ण समय पर बारिश होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होने की आशंका है।

कारीगरों को उम्मीद है कि मौसम जल्द साफ होगा और धूप निकलने से निर्माण कार्य दोबारा सामान्य गति पकड़ सकेगा। फिलहाल वे अपने तैयार सामान को सुरक्षित रखने और उपलब्ध संसाधनों के सहारे काम जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।

रांची के पारंपरिक मिट्टी शिल्प से जुड़े इन कारीगरों के लिए आने वाले दिन काफी अहम हैं। मौसम में सुधार नहीं होने पर त्योहारों से पहले उत्पादन और बिक्री दोनों प्रभावित हो सकते हैं।