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रांची में फेसबुक मैसेंजर पर रिश्तेदार बनकर 5.11 लाख रुपये की ठगी, साइबर अपराधियों ने युवक को बनाया निशाना


रांची, 29 अक्टूबर 2026। झारखंड की राजधानी रांची में सोशल मीडिया के जरिए साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है। फेसबुक मैसेंजर पर रिश्तेदार बनकर संपर्क करने वाले एक साइबर अपराधी ने कथित तौर पर एक युवक से 5.11 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी ने परिचित होने का भरोसा दिलाकर पैसों की जरूरत बताई, जिसके बाद युवक ने उसकी बातों पर विश्वास कर रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने मामले की शिकायत की। घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान के जरिए लोगों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों के तरीकों को उजागर किया है।

फेसबुक मैसेंजर पर शुरू हुआ संपर्क

मिली जानकारी के अनुसार, ठगी की शुरुआत फेसबुक मैसेंजर पर बातचीत से हुई। आरोपी ने खुद को पीड़ित का रिश्तेदार बताकर उससे संपर्क किया। सोशल मीडिया पर परिचित का नाम और पहचान सामने आने के कारण युवक को शुरुआत में बातचीत संदिग्ध नहीं लगी।

इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर आर्थिक परेशानी या तत्काल पैसों की जरूरत का हवाला दिया। उसने इस तरह बातचीत की कि युवक को लगा कि मदद मांगने वाला व्यक्ति वास्तव में उसका रिश्तेदार ही है। इसी भरोसे के आधार पर पीड़ित ने पैसे भेजने का फैसला कर लिया।

अलग-अलग लेनदेन में गंवाई बड़ी रकम

साइबर अपराधी की बातों में आकर युवक ने कुल 5.11 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इतनी बड़ी रकम भेजने के बाद जब उसे मामले पर संदेह हुआ और उसने वास्तविक रिश्तेदार से संपर्क कर जानकारी लेने की कोशिश की, तब धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

इसके बाद पीड़ित को समझ आया कि सोशल मीडिया पर संपर्क करने वाला व्यक्ति उसकी पहचान का फायदा उठाकर पैसे ऐंठ रहा था। घटना के बाद उसने संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर रकम वापस दिलाने और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि रकम कितने अलग-अलग लेनदेन में भेजी गई, आरोपी ने किस भुगतान माध्यम का इस्तेमाल कराया और ठगी की रकम में से कितनी राशि को रोका या वापस प्राप्त किया जा सका है।

रिश्तेदार बनकर ठगी करना साइबर अपराधियों का नया तरीका नहीं

साइबर अपराधी लोगों के विश्वास का फायदा उठाने के लिए कई तरह के तरीके अपनाते हैं। इनमें फेसबुक, व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी परिचित की तस्वीर या नाम का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल बनाना भी शामिल है।

ऐसे अपराधों में ठग अक्सर अचानक पैसों की जरूरत, अस्पताल में भर्ती होने, दुर्घटना या किसी जरूरी भुगतान का हवाला देते हैं। वे पीड़ित पर जल्द से जल्द पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं, ताकि वह स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि न कर सके।

कई बार असली व्यक्ति का सोशल मीडिया अकाउंट हैक करके भी उसके संपर्कों से पैसे मांगे जाते हैं। इसलिए केवल प्रोफाइल फोटो, नाम या पुरानी बातचीत के आधार पर किसी की पहचान को सही मान लेना जोखिम भरा हो सकता है।

साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों की सामान्य साइबर सुरक्षा सलाह के अनुसार, सोशल मीडिया पर पैसे मांगने वाला कोई परिचित हो, तब भी रकम भेजने से पहले उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।

  • फोन करके पुष्टि करें: पैसे मांगने वाले व्यक्ति से उसके पहले से ज्ञात मोबाइल नंबर पर सीधे बात करें।

  • वीडियो कॉल से पहचान जांचें: यदि संभव हो, तो वीडियो कॉल के जरिए व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करें।

  • जल्दबाजी में निर्णय न लें: आपात स्थिति का हवाला देकर तुरंत पैसे भेजने के दबाव में न आएं।

  • संदिग्ध लिंक से बचें: किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, बैंक विवरण या यूपीआई पिन साझा न करें।

  • तुरंत शिकायत करें: यदि रकम ट्रांसफर हो गई है, तो बिना देर किए बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।

ठगी होने पर तुरंत उठाएं कदम

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पीड़ित को भुगतान का स्क्रीनशॉट, बैंक लेनदेन का विवरण, संबंधित फेसबुक प्रोफाइल का लिंक, मैसेंजर चैट और आरोपी से हुई बातचीत के अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने चाहिए। ये जानकारियां जांच एजेंसियों को लेनदेन का पता लगाने और संदिग्ध खाते की पहचान करने में मदद कर सकती हैं।

बैंक को तत्काल सूचित करने से संदिग्ध लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, रकम की वापसी की गारंटी नहीं होती और परिणाम जांच तथा संबंधित बैंकिंग प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष: रांची में फेसबुक मैसेंजर पर रिश्तेदार बनकर 5.11 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी परिचित के नाम से आया संदेश हमेशा वास्तविक नहीं होता। पैसों की मांग होने पर स्वतंत्र रूप से पहचान की पुष्टि करना और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत शिकायत करना सबसे जरूरी कदम है।