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जुबिली कॉलेज में बुद्धिमत्ता के भविष्य को आकार देना पर दो दिवसीय राष्ट्रीय व्याख्यान शुरु



भुरकुंडा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज मानव जीवन के हर क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह जितनी बड़ी संभावनाएं लेकर आया है, उतनी ही गंभीर चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। इसी विषय पर चर्चा करने के लिए सोमवार को जुबिली कॉलेज में बुद्धिमत्ता के भविष्य को आकार देना विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय व्याख्यान कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के पहले दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व शिक्षक आईआईटी खड़गपुर प्रो टीएस पॉल, विशिष्ट अतिथि बरका-सयाल जीएम रंजय सिन्हा, एनआईएटी हटिया, रांची प्रो अनिल कुमार, किटप यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर डॉ एसके राउत, आईआईटी खड़गपुर डॉ अंजली पॉल, बीआईटी मेसरा डॉ इसा राउत, सचिव जुबिली कॉलेज डॉ उर्मिला सिंह, आईआईटी निदेशक रांची डॉ राजीव श्रीवास्तव व योगदा सत्संग विवि रांची कंदर्प विद्यासागर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य बालकृष्ण ने अतिथियों का अंगवस्त्र के साथ स्वागत कर किया। इसके पश्चात पूर्व शिक्षक जुबिली कॉलेज डॉ शंभु प्रसाद ने भविष्य के बुद्धिमत्ता का आकार विषय पर विस्तृत प्रवेश वक्तव्य दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो टीएस पॉल ने कहा कि एआई के सकारात्मक पक्ष चिकित्सा, शिक्षा, कृषि और उद्योग जगत के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। बीमारियों की शुरुआती पहचान, लैब रिपोर्ट का सटीक विश्लेषण और उपचार के फैसलों में यह डॉक्टरों की मदद कर रहा है। वहीं छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पढ़ाई और कृषि क्षेत्र में मौसम व फसल संबंधी सटीक विश्लेषण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि बड़े डेटा का विश्लेषण कर नई खोजों को गति मिल रही है और उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने एआई के नकारात्मक और जोखिम भरे पहलुओं पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अत्यधिक निर्भरता से पारंपरिक नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग, डीपफेक वीडियो और भ्रामक सूचनाओं का प्रसार आज समाज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एआई के हर जवाब को बिना सोचे-समझे सही मान लेना और महत्वपूर्ण निर्णय मशीनों पर छोड़ना नुकसानदेह हो सकता है। वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय विवेक, नैतिकता और जिम्मेदारी का होना बेहद जरूरी है। मंच का संचालन डॉ एसपी पांडेय ने किया।

छात्रों के लिए भविष्य की राह : बालकृष्ण

कॉलेज के प्राचार्य बालकृष्ण ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को एआई की बदलती दुनिया, कौशल विकास और भविष्य के रोजगार अवसरों से परिचित कराना है। दो दिवसीय इस आयोजन के दौरान तकनीकी सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चा और प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिससे विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझने का मौका मिला।