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धनबाद के बारामुड़ी में 155 मकान-दुकानों पर प्रशासन का नोटिस, सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की तैयारी


धनबाद, 29 अक्टूबर 2026। झारखंड के धनबाद जिले के बारामुड़ी खटाल इलाके में जिला प्रशासन की कार्रवाई से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने 155 मकानों और दुकानों को नोटिस जारी किया है। संबंधित लोगों को निर्धारित समय के भीतर अंचल कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में संभावित बेदखली और पुनर्वास को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

करीब 18 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण का मामला

प्रशासन के अनुसार, बारामुड़ी खटाल क्षेत्र में लगभग 18 एकड़ सरकारी जमीन की मापी और सीमांकन कराया गया था। इस दौरान करीब 200 मकानों का सर्वे कर जमीन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच के बाद 155 मकानों और दुकानों को चिह्नित करते हुए उनके संचालकों या कब्जाधारियों को नोटिस दिया गया।

यह कार्रवाई धनबाद अंचल कार्यालय की ओर से की गई है। अधिकारियों का उद्देश्य सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना और कथित अतिक्रमण के मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाना है। नोटिस जारी करने से पहले जमीन की मापी कराई गई, ताकि संबंधित भूखंडों की पहचान और सीमाओं का निर्धारण किया जा सके।

सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश

नोटिस मिलने के बाद संबंधित परिवारों और दुकानदारों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने की तैयारी करनी पड़ रही है। उन्हें जमीन पर अपने अधिकार, कब्जे या आवंटन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।

प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, संबंधित लोगों को 2 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे अंचल अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होने की स्थिति में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर एकतरफा निर्णय लिए जाने की संभावना है।

हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी मकानों को तत्काल खाली कराया जा रहा है। आगे की कार्रवाई संबंधित लोगों के जवाब, प्रस्तुत दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।

वर्ष 2005 में बसाए जाने का दावा

बारामुड़ी खटाल में रहने वाले कई परिवारों का कहना है कि उन्हें लगभग 21 वर्ष पहले बेकारबांध तालाब के आसपास से हटाकर यहां बसाया गया था। उनके मुताबिक, वर्ष 2005 में तत्कालीन जिला प्रशासन की व्यवस्था के तहत उन्हें इस इलाके में रहने और मवेशी रखने की जगह मिली थी।

अब सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का नोटिस मिलने से इन परिवारों के सामने आवास और आजीविका को लेकर चिंता पैदा हो गई है। कई परिवार पशुपालन और दूध की बिक्री पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें यहां से हटाया जाता है, तो रहने की जगह के साथ मवेशियों को रखने और कारोबार चलाने की समस्या भी खड़ी हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि किसी भी अंतिम कार्रवाई से पहले पुनर्वास से संबंधित पुराने सरकारी रिकॉर्ड की जांच की जाए और प्रभावित परिवारों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।

प्रशासन का क्या है रुख?

जिला प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण को हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अनुमति के बिना पक्के निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। संबंधित लोगों को पहले नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिया जा रहा है।

इस मामले में जमीन के पुराने आवंटन, वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड और निर्माण की वैधता की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि संबंधित परिवारों के पास आवंटन पत्र या अन्य सरकारी दस्तावेज हैं, तो उनका परीक्षण आगे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

पुनर्वास और बेदखली को लेकर बढ़ा विवाद

नोटिस जारी होने के बाद बारामुड़ी खटाल के प्रभावित लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि पुराने पुनर्वास संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा होने तक मकानों को तोड़ने या परिवारों को बेदखल करने जैसी कार्रवाई पर विचार किया जाए। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी सामने आया है।

अब सबकी नजर अंचल कार्यालय में होने वाली सुनवाई और दस्तावेजों की जांच पर है। प्रशासन का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित लोग अपने पक्ष में कौन-से प्रमाण प्रस्तुत करते हैं और सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से क्या स्थिति सामने आती है।

निष्कर्ष: धनबाद के बारामुड़ी खटाल में 155 मकानों और दुकानों को जारी नोटिस सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण की जांच का हिस्सा है। एक ओर प्रशासन जमीन खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय परिवार पुराने पुनर्वास रिकॉर्ड की जांच और उचित सुनवाई की मांग कर रहे हैं। मामले में अंतिम कार्रवाई से पहले दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब की भूमिका अहम रहेगी।