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करौं के 14 पंचायत सचिवालयों में लटके ताले, सरकारी आदेश के बावजूद एक भी पंचायत सचिव नहीं कर रहा आवास


रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

करौं (देवघर) : सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर ही सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पंचायत सचिवालयों का निर्माण कराया है, लेकिन करौं प्रखंड में यह व्यवस्था पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। प्रखंड के सभी 14 पंचायतों के सचिवालयों में हर समय ताला लटका रहता है, क्योंकि नियमानुसार आवासन करने वाले एक भी पंचायत सचिव अपने मुख्यालय में नहीं रह रहे हैं।

प्रखंड में रानीडीह, सालतर, करौं, डिंडाकोली, गंजोबारी, बिरंगड़िया, टेकरा, कसैया, बारा, पथरोल, सिरसा, बघमाडीह, नागादेरी और बदिया पंचायतें हैं। जानकारी के अनुसार एक-दो पंचायत सचिवालय ही कभी-कभार जरूरी काम पड़ने पर खुलते हैं। मुखिया जरूर सचिवालय आते हैं, लेकिन पंचायत सचिव नदारद रहते हैं।

क्या कहता है नियम ?

झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग के नियमानुसार प्रत्येक पंचायत सचिव को संबंधित पंचायत सचिवालय में ही आवासन (निवास) करना अनिवार्य है। इसके लिए सचिवालय परिसर में पेयजल, शौचालय, बिजली सहित आवासीय सुविधा सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है। रोस्टर के अनुसार सचिवालय को प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 05 बजे तक खुला रखना है, ताकि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, पेंशन, मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े कार्य ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर ही मिल सकें। लेकिन करौं में इस नियम की खुलेआम अवहेलना हो रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश सचिव जिला मुख्यालय देवघर या अनुमंडल मुख्यालय मधुपुर में रहकर अपनी मनमर्जी से सचिवालय आते-जाते हैं। जब किसी योजना की राशि आती है, तब तो वे सचिवालय में जरूर दिखते हैं, बाकी दिनों में गायब रहते हैं। एक-एक सचिव पर तीन-तीन पंचायतों का प्रभार है, जिसका फायदा उठाकर वे मुख्यालय से ही काम चला रहे हैं।

पंचायत सचिवालय बंद रहने से गरीब-गुरबा को जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आवास और अन्य जरूरी कागजातों के लिए बेरंग लौटना पड़ता है।

इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी ऋषि राज ने कहा कि मामला संज्ञान में है, जांच के दौरान अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित सचिवों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

इधर ग्रामीणों ने देवघर उपायुक्त  से सभी 14 पंचायत सचिवालयों की औचक जांच कराकर लापरवाह सचिवों पर सख़्त कार्रवाई की मांग की है।