समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले के बेला पचरुखी स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और डिजिटल गोपनीयता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को इंटरनेट का सावधानीपूर्वक उपयोग करने और साइबर अपराधों से बचने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया गया कि इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। साइबर अपराधी कई बार फर्जी संदेश, संदिग्ध वेबसाइट और आकर्षक ऑफर के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए लिंक पर बिना जांच किए क्लिक न करें। इसी तरह, संदिग्ध संदेशों में दिए गए निर्देशों का पालन करने या किसी वेबसाइट पर निजी जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। छात्राओं को यह भी समझना जरूरी है कि बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी, पासवर्ड और ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान करना या व्यक्तिगत विवरण देना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। कार्यक्रम में साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट के माध्यम से किसी को परेशान करने, धमकाने, अपमानित करने या उसके बारे में आपत्तिजनक सामग्री फैलाने जैसे मामलों पर भी जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि सोशल मीडिया पर किसी के साथ दुर्व्यवहार होने पर चुप रहने के बजाय विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक या संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। परेशान करने वाले अकाउंट को ब्लॉक और रिपोर्ट करने के साथ जरूरत पड़ने पर संबंधित संदेशों या स्क्रीनशॉट को सबूत के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है। किसी अन्य विद्यार्थी की तस्वीर, वीडियो या निजी बातचीत उसकी अनुमति के बिना साझा करने से भी बचना चाहिए। डिजिटल माध्यमों पर सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखना ऑनलाइन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छात्राओं को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल और डिजिटल गोपनीयता के बारे में भी जागरूक किया गया। इंटरनेट पर साझा की गई तस्वीरें, वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियां दूसरे लोगों तक पहुंच सकती हैं। इसलिए किसी भी सामग्री को पोस्ट करने से पहले उसके संभावित परिणामों पर विचार करना जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग की जांच करने, मजबूत पासवर्ड बनाने और जहां संभव हो, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। सार्वजनिक मंचों पर घर का पता, फोन नंबर, लाइव लोकेशन और अन्य संवेदनशील जानकारियां साझा करने से भी बचना चाहिए। आज शिक्षा, संचार और दैनिक गतिविधियों में इंटरनेट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए डिजिटल तकनीक का ज्ञान हासिल करने के साथ उसके सुरक्षित इस्तेमाल के नियम समझना भी महत्वपूर्ण है। विद्यालयों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को संभावित ऑनलाइन खतरों की पहचान करने और जिम्मेदारी के साथ इंटरनेट इस्तेमाल करने में मदद कर सकते हैं। खासकर कम उम्र के विद्यार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है। समस्तीपुर के बेला पचरुखी स्थित विद्यालय में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सावधानी और गोपनीयता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अनजान लिंक से दूरी बनाना, मजबूत पासवर्ड रखना और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जिम्मेदार लोगों को देना साइबर अपराध से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं। नोट: उपलब्ध जानकारी में कार्यक्रम की तारीख, आयोजनकर्ता, मुख्य वक्ता और उपस्थित अधिकारियों के नाम का विवरण नहीं है। इसलिए इन तथ्यों की पुष्टि के बिना उन्हें खबर में शामिल नहीं किया गया है।ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के तरीके बताए गए
साइबर बुलिंग के प्रति किया गया जागरूक
सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचने की सलाह
डिजिटल जागरूकता विद्यार्थियों के लिए जरूरी
सतर्कता से कम किया जा सकता है साइबर अपराध का जोखिम
समस्तीपुर के स्कूल में साइबर सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम, छात्राओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के बताए तरीके


.jpg)


